बरेली। भाजपाई खेमा उत्साह से भरपूर दिख रहा है। एक-एक मतदाता को वह बूथ तक लाए। मतदान केंद्रों पर भी भाजपाई खेमे का उत्साह देखते ही बन रहा था। यदि इस बार भाजपा प्रत्याशी महाराज सिंह ने जीत हासिल की तो भाजपा बरेली-रामपुर सीट पर 24 साल पुराना सूखा खत्म करने में कामयाब होगी। बरेली-रामपुर सीट पर विधान परिषद का पहला चुनाव 1998 में हुआ था। उस समय भाजपा ने दिग्विजय सिंह को चुनाव लड़ाया और उन्हाेंने इस सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2004 में इस सीट पर समाजवादी पार्टी ने कब्जा जमाया। रामपुर के घनश्याम लोधी को चुनाव लड़ाया। घनश्याम लोधी ने जीत हासिल की। 2010 का चुनाव बसपा सरकार में हुआ और उस समय बसपा में रहे के सर सिंह गंगवार ने जीत हासिल की। बाद में वह भाजपा में आ गए और 2017 में नवाबगंज सीट से विधानसभा चुनाव जीता। पिछले साल कोविड लहर में वह दिवंगत हो गए। 2016 के चुनाव में एक बार फिर सपा ने यहां वापसी की और घनश्याम लोधी ने चुनाव जीता। इसी विधानसभा चुनाव में घनश्याम लोधी सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए तो सपा ने आजम खां के करीबी मशकूर अहमद मुन्ना को प्रत्याशी बनाया है। भाजपा ने महाराज सिंह को चुनाव लड़ाया है।
चुनाव अच्छा हुआ है और मैंने चुनाव अच्छे से लड़ा भी है। बाकी हार-जीत का फैसला तो मतगणना के बाद ही होगा। इस पर अभी क्या कहूं।
- मशकूर अहमद मुन्ना, प्रत्याशी, सपा
बरेली-रामपुर दोनों जनपदों के संगठन, कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधियों ने मुझे पहले दिन से ही बहुत मजबूती से चुनाव लड़ाया है। सभी पूरे मनोयोग से जुटे। मेरे परिजन और मित्रगण भी पूरी मेहनत से चुनाव में लगे रहे। मुझे विश्वास है कि प्रचंड जीत होगी। - महाराज सिंह, प्रत्याशी, भाजपा