बरेली। पुलिस की जोर-जबर्दस्ती की वजह से रविवार को रेत भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर घायल हुई सात वर्षीय बच्ची फलक की भी मौत हो गई। पुलिस ने जबरन उसे बरेली लाकर निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था, जहां डॉक्टरों ने उसके परिजन 50 हजार की मांग की। परिवार वालों का आरोप है कि पूरी रकम का बंदोबस्त न होने पर फलक का इलाज नहीं किया गया। इसी वजह से उसकी जान चली गई।
शीशगढ़ के गांव रतनपुर के पास भाखड़ा नदी में अवैध खनन करके रेत भरकर ला रही ट्रैक्टर-ट्रॉली ने रविवार को नदी में नहा रहे दो बच्चों को कुचल दिया था। इस घटना में यूसुफ खां के छह वर्षीय बेटे साहिल की मौके पर ही मौत हो गई थी और उनके बड़े भाई इंदर खां की सात वर्षीय बेटी फलक दोनों पैरों के ऊपर से ट्रॉली का पहिया गुजर जाने की वजह से गंभीर घायल हो गई थी। सोमवार सुबह फलक ने भी दम तोड़ दिया।
गांव के लोगों ने फलक की मौत का जिम्मेदार शीशगढ़ पुलिस को ठहराया है। दरअसल हादसा होने के बाद फलक के पिता तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए थे। उन्होंने ही पुलिस को घटना की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आननफानन एक एंबुलेंस बुलाकर फलक को खुद बरेली लाकर मिनी बाईपास पर एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। फलक के परिवार के लोगों को एंबुलेंस में बैठने तक नहीं दिया।
परिवार के लोग किराए की गाड़ी से अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टर ने फलक आपरेशन का दो लाख रुपये का खर्च बताते हुए 50 हजार रुपये फौरन जमा करने को कहा। इस पर उन्होंने रिश्तेदारों से मांगकर किसी तरह बीस हजार रुपये का इंतजाम किया लेकिन रकम पूरी न होने की वजह से अस्पताल में फलक का इलाज नहीं किया। बाकी पैसों का इंतजाम न होने पर रात करीब तीन बजे परिवार वालों ने फलक को ले जाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन सुबह पांच बजे उसने दम तोड़ दिया।
मांएं बिलखीं... ये हादसा नहीं है, हमारे बच्चों की हत्या की गई
मासूम साहिल की मां खुशनुमा और फलक की मां तब्बसुम जांच करने पहुंची तहसीलदार रश्मि कुमारी के सामने बिलखती रहीं। उन्होंने कहा कि ये हादसा नहीं है, रंजिश में उनके बच्चों की ट्रैक्टर ट्रॉली से कुचलकर हत्या की गई है। उन्होंने तहसीलदार से आरोपियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। खुशनुमा ने बताया कि वह हरदोई गई हुई थीं। गांव वाले मांग कर रहे थे कि उनके लौटने के बाद ही उनके बेटे साहिल का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाए लेकिन आरोपियों से सांठगांठ के कारण पुलिस ने ग्रामीणों को धमकाकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
शाही और शीशगढ़ पुलिस अवैध खनन
और दो बच्चों की मौत की जिम्मेदार
तहसीलदार ने गांव वालों के बयान दर्ज कर दोनों थानों के खिलाफ भेजी रिपोर्ट
खनन माफिया की रेत भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर दो बच्चों की मौत के बाद सोमवार को मीरगंज की तहसीलदार रश्मि कुमारी ने पांच लेखपालों और एक कानूनगो के साथ गांव पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ गांव वालों के बयान दर्ज किए। लोगों ने तहसीलदार को बताया कि शीशगढ़ और शाही पुलिस की सांठगांठ से भाखड़ा नदी में रात-दिन अवैध खनन होता है। यहां से रेत भरकर ले जाने वाले ट्रैक्टर ट्रॉली ज्यादा से ज्यादा फेरे लगाने के लिए अंधाधुंध रफ्तार से गुजरते हैं, उनकी की चपेट में आकर कई लोग घायल हो चुके हैं। शिकायत करने के बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं करती। तहसीलदार ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
अवैध खनन के साथ पुलिस की शह पर
असलहा फैक्टरी भी चलाता है आबिद
गांव के लोगों ने तहसीलदार को बताया कि इस मामले में नामजद एक आरोपी आबिद बेहद दबंग किस्म का है। उसके घर दो बार असलहा फैक्टरी पकड़ी जा चुकी है। इस मामले में उसके खिलाफ शीशगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस का संरक्षण होने की वजह से अब भी उसके यहां असलहे बनाए जाते हैं।
राजस्व टीम के साथ मौका मुआयना कर ग्रामीणों के बयान दर्ज किए हैं। लोगों ने अपने बयान में शीशगढ़ और शाही थाना पुलिस की सांठगांठ से अवैध खनन होने की बात कही है। आरोपियों पर कार्रवाई की संस्तुति करते हुए मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है। - रश्मि कुमारी, तहसीलदार मीरगंज