बरेली। गाड़ियों की चेकिंग को लेकर यातायात पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई से नागरिकों से लेकर सत्ताधारी पार्टी के लोग तक सहमे हुए हैं। पुलिस की कार्रवाई को लेकर भेदभाव के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। सर्वाधिक फोकस दुपहिया वाहनों पर है, जिनकी वजह से पुलिस ने जुर्माने का सत्तर लाख जैसा रिकॉर्ड पार किया है।
शासन के निर्देश पर जून माह से शुरू हुआ चेकिंग अभियान फिलहाल थमा नहीं है। उर्स में स्टाफ लगने से कार्रवाई दो दिन धीमी जरूर पड़ गई है पर लगातार जारी रहने का दावा अफसर कर रहे हैं। जून माह में कुल 25,393 वाहनों का चालान किया गया। इसमें 33 लाख से ज्यादा राजस्व वसूला गया। एक जुलाई से फिर अभियान जारी है और औसतन पांच लाख का जुर्माना रोज वसूला जा रहा है। इसमें भी करीब 85 फीसदी कार्रवाई दुपहिया वाहनों पर हो रही है। दुपहिया वाहनों के चालान सीओ ट्रैफिक तो चार पहिया वाहनों के चालान एसपी ट्रैफिक दफ्तर में छुड़वाए जाते हैं। दोनों जगह रोज ही मेले जैसा माहौल होता है। भारी भीड़ अपने चालान जमा कराने आती है। बाइक वालों पर पांच सौ से लेकर सात हजार तक का जुर्माना पड़ रहा है तो टेंपो व कार वालों पर दस हजार से लेकर 20 हजार तक का जुर्माना हो रहा है। अधिकांश चालान चूंकि दुपहिया वाहनों के होते हैं, इसलिए सीओ ट्रैफिक के दफ्तर पर सर्वाधिक भीड़ रहती है।
ऑटो ड्राइवरों की दबंगई बरकरार
भले ही शहर में चेकिंग अभियान चल रहा हो, लेकिन ट्रैफिक पुलिस को ऑटो वालों की दबंगई नहीं दिखती। ट्रैफिक पुलिस की मेहरबानी की वजह से ही ऑटो ई रिक्शा वाले आम लोगों को लिए सिरदर्द बन रहे हैं। चौराहे घेरकर वाहनों को खड़ा कर रहे हैं। ई रिक्शा पर कोडिंग की योजना भी अधर में लटकी है। ऐसा होने पर वे एक इलाके में सीमित हो सकते थे पर प्लान अभी तक लागू नहीं हो पा रहा।
‘वाहनों की चेकिंग का अभियान शासन की प्राथमिकता का काम है। हर दुपहिया वाहन चालक को हेलमेट और चार पहिया वालों को सीट बेल्ट पहनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए चेकिंग की जा रही है। इसका व्यापक असर भी दिख रहा है। पुलिसकर्मी भी हेलमेट लगा रहे हैं। अभियान जारी रहेगा, यातायात पुलिस अपनी जिम्मेदारी वाले दूसरे काम भी करती रहेगी।’
- सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी ट्रैफिक