जहानाबाद इलाके बेनीपुर गांव निवासी रिटायर्ड रेलकर्मी वेगराज और उनके परिवार के चार सदस्यों को डाइक्लोरोवास (कीटनाशक) देकर मारा गया था। विसरा रिपोर्ट आने पर दूध में जहर मिलाए जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि अमर उजाला ने वारदात के बाद ही घटना में डाइक्लोरोवास के इस्तेमाल की आशंका जता दी थी। विसरा रिपोर्ट आने के बाद पुलिस ने जेल भेजे गए तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी है। पुलिस की विवेचना में वारदात को अंजाम घर में रखी नकदी लूटने के मकसद से किए जाने की बात सामने आई है।
सात जनवरी को जहानाबाद थाना क्षेत्र के बेनीपुर गांव निवासी वेगराज, उनकी पत्नी रामवती, उनके बेटा नेमचंद, पुत्रवधू ममता और वेगराज की विवाहित बेटी गायत्री देवी की दूध में जहर देकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने घटना की विवेचना की तो मृतक नेमचंद का दोस्त भोजीपुरा बरेली के खंजनपुर गांव का निवासी गुलशेर का नाम सामने आया। इसमें उसके दो भतीजे तस्लीम और सलीम की शामिल रहे थे।
पुलिस ने सबूत जुटाने के बाद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस ने खुलासे के समय बताया था कि घटना को अंजाम वेगराज के घर रखे पांच लाख रुपये लूटने के लिए दिया गया था। वेगराज ने यह रकम प्लॉट खरीदने के लिए रखी। आरोपी तंत्रमंत्र करने के बहाने वेगराज के घर पहुंचे थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतकों के पेट में जहर के लक्षण मिले थे, जिसकी पुष्टि के लिए विसरा जांच के लिए भेजा गया था। विसरा रिपोर्ट आने पर दूध में डाइक्लोरोवास मिलाए जाने की पुष्टि हुई। विवेचक इंस्पेक्टर कमल सिंह ने बताया कि विवेचना पूरी कर ली गई थी। केवल विसरा रिपोर्ट का इंतजार था। विसरा रिपोर्ट के अनुसार पांचों लोगों की मौत डाइक्लोरोवास जहर से होने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट आने के बाद चार्जशीट न्यायालय में दाखिल कर दी गई।
प्रसाद के बहाने पिलाया था जहर मिला दूध
सामूहिक हत्याकांड को आरोपी गुलशेर ने बड़ी आसानी से अंजाम दे दिया था। दरअसल, नेमचंद से दोस्ती होने के नाते पूरा परिवार गुलशेर पर भरोसा करता था। यही वजह रही कि घर पर रखी नकदी की जानकारी भी उसे दे दी गई थी। गुलशेर योजना के तहत तंत्रमंत्र के नाम पर पूजा करने के बहाने नेमचंद के घर गया। गुलशेर ने तंत्रमंत्र करने के दौरान साथ लाया जहर दूध में मिलाने के बाद प्रसाद के रूप में सभी को पिला दिया था।
जनवरी 2018 से है प्रतिबंधित डाइक्लोरोवास
कीटनाशक डाइक्लोरोवास बाजार में न्यूबॉन नाम से बेचा जाता है। डाइक्लोरोवास इसका साल्ट है। कीटनाशक विशेषज्ञों की मानें तो हल्के पीले रंग का ये कीटनाशक तैलीय अवस्था में होता है। डाइक्लोरोवास हवा के संपर्क में आते ही वाष्पीकरण की क्रिया करके हवा में घुल जाता है। अगर कोई व्यक्ति डाइक्लोरोवास मिश्रित हवा के संपर्क में आ जाए तो यह उसके तंत्रिका और श्वास तंत्र पर गहरा असर करता है। व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। ये तेज कीटनाशक है। फसलों को कीटों से बचाने के लिए इसका छिड़काव किया जाता है। एक बार किए गए छिड़काव का असर पांच दिन तक रहता है। खास बात है कि एक जनवरी 2018 से देशभर में इस कीटनाशक को प्रतिबंधित कर दिया गया था। जहानाबाद की घटना प्रतिबंध लगने के एक साल बाद जनवरी 2019 में हुई। ऐेसे में आरोपियों के पास ये जहर कहां से आया? उन्होंने इसे कहां से खरीदा? कहीं चोरी छिपे इसकी बिक्री तो नहीं की जा रही? ये सवाल भी उठकर सामने आ गए हैं।
बेनीपुर गांव में हुए पांच लोगों की हत्या के मामले में विवेचना पूरी हो चुकी है। विसरा रिपोर्ट में भी जहर देकर हत्या किए जाने की बात सामने आई है।
- रोहित मिश्र, एएसपी