बरेली। सात गांवों की 561 हेक्टेयर जमीन पर प्रस्तावित परसाखेड़ा आवासीय योजना लेटलतीफी का शिकार होकर रह गई है। वर्ष 2022 में योजना मंजूर हुई तो लैंड पूलिंग स्कीम के तहत जमीन देने वाले किसानों को एक साल के भीतर भूखंड आवंटित करने का वादा किया गया था, लेकिन आवास विकास परिषद के अधिकारी और अभियंता तीन साल बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। बार-बार तारीख आगे बढ़ाई जाती रही। अब नवंबर में भूखंड आवंटन और बैनामे शुरू कराने का वादा किया जा रहा है।
आवास विकास परिषद के अधिशासी अभियंता राजेंद्रनाथ के मुताबिक, नवंबर में योजना का ले आउट मंजूर होगा और भूखंड आवंंटित किए जाएंगे। इसके बाद लैंड पूलिंंग स्कीम के तहत 200 किसानों की जमीन का बैनामा आवास विकास परिषद अपने नाम कराएगा।
इसके बाद उनकी ही जमीन के चौथाई हिस्से के बराबर भूखंड का आवंटन और बैनामा भू स्वामी के नाम पर होगा।
अगले छह महीने में स्थल विकास होगा ताकि भू स्वामी वहां अपना आशियाना बना सकें। सबसे पहले टियूलिया और धंतिया गांव में योजना के सेक्टर एक, दो, तीन और चार के उन भू स्वामियों को भूखंड मिलेंगे, जिन्होंने लैंड पूलिंग स्कीम में सहमति दी है। एक ओर किसान, आवास विकास परिषद के नाम अपनी जमीन का बैनामा करेंगे। दूसरी ओर, उनके नाम चौथाई रकबे का भूखंड आवंटित किया जाएगा। उसका बैनामा परिषद किसान के नाम कराएगा। दोनों में रजिस्ट्री का शुल्क नहीं देना पड़ेगा। ब्यूरो