वक्फ की संपत्तियां अपार हैं, साथ ही बेशकीमती भी। जाहिर है कि मौका मिले तो कौन नहीं इन संपत्तियों पर हक जमाना चाहेगा। जिले भर में यही हो रहा है। कुतुबखाना की मस्जिद हो या करमपुर चौधरी गांव के जलसे का विवाद, सारी रार के पीछे वक्फ संपत्तियों पर कब्जा जमाने की मंशा ही है। यह रार इसलिए और बढ़ रही है क्योंकि प्रदेश सरकार के वक्फ और सर्वे विभाग में न इन संपत्तियों का कोई रिकॉर्ड है न उनकी निगरानी के लिए स्टाफ। हद तो यह है कि वक्फ का महकमा प्रदेश सरकार के सबसे दबंग मंत्री के अधीन होने के बावजूद सवा साल से यहां वक्फ इंस्पेक्टर की तैनाती तक नहीं हुई है। एक बाबू था जो रिटायर हो गया। महकमे का तो कोई नुमाइंदा रहा नहीं, लिहाजा वक्फ संपत्तियों की रखवाली की जिम्मेदारी अब खुदा पर ही आन पड़ी है।
पिछले दिनों कुतुबखाना की मस्जिद के विवाद के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन को वक्फ संपत्तियों के रखरखाव की याद आई तो पता चला कि विभाग में फरवरी 2014 से वक्फ इंस्पेक्टर तैनात नहीं है। फरवरी 2014 में वक्फइंस्पेक्टर अब्दुल मजीद खां के तबादले के बाद से वक्फ बोर्ड को मासिक रिपोर्ट तक नहीं भेजी जा रही है। सबसे दबंग मंत्री के महकमे का हाल यह है कि प्रदेश के 75 जिलों में कुल 17 ही वक्फ इंस्पेक्टर हैं। जब भी कोई विवाद होता है तब तो वक्फ संपत्तियां नजर आती हैं लेकिन महकमे में इनका सिजरा कहां है, इसका कहीं कोई अता-पता नहीं है।
वक्फ संपत्तियों का कोई रिकॉर्ड और उन पर निगरानी न होने की वजह से ही उन पर जबरन कब्जा करने की कोशिशें हो रही हैं। इसके लिए हर तरह से जब-तब ताकत की भी नुमायश की जाती है। पुराने रिकार्ड पर गौर करें तो पता चलता है कि बरेली जिले में वक्फ की 39445 संपत्तियां हैं जिनमें सुन्नी वक्फ बोर्ड की 3841 और शिया वक्फ बोर्ड की 103 संपत्ति हैं। इन पर मुतवल्ली तो तैनात हैं लेकिन वक्फ विभाग में इनकी कोई देखरेख करने वाला नहीं है। इन्हीं में 1120 कब्रिस्तान भी दर्ज हैं। जहां तक शहर की वक्फ संपत्तियों का सवाल है, इनमें अधिकांश के विवाद वक्फ बोर्ड या न्यायालयों में विचाराधीन है। इन विवादों का निस्तारण इसलिए नहीं हो पा रहा है कि उनसे संबंधित अभिलेख अदालत या बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं।
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फरवरी 2014 से बरेली में वक्फ इंस्पेक्टर की तैनाती नहीं हुई है जबकि जिलाधिकारी की ओर से कई पत्र आयुक्त वक्फ सर्वे एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को लिखे जा चुके हैं। विवादों के निस्तारण के लिए अदालत और बोर्ड में अभिलेखों के अनुसार पैरवी की जा रही है। - जगमोहन सिंह, सहायक आयुक्त वक्फ