सराय खाम में मिठाई खाने और नारे लगाने की बात को सिरे से खारिज करतेे हुए खानकाह शराफतिया के प्रबंधक मुमताज मिया ने कहा है कि हमारा देवबंदियों से कोई तालमेल नहीं हो सकता। हमारे अकायद अलग हैं और उनके अलग हैं। हमारे बुजुर्गों को मानते का तरीका अलग और उनका अलग । वो रसूल को दूसरे तरीके से मानते हैं और हम अलग । उन्होंने कहा कि जो लोग सकलैनी सिलसिले के खिलाफ अफवाह फैला रहे हैं, उनको हम अल्लाह के सुपुर्द करते हैं।
रजवी और सकलैनी झगड़े में घायलों को जिला अस्पताल देखने के लिए पहुंचने के मामले में उन्होंने कहा कि अगर कोई किसी मरीज को देखने चला जाए तो उसका महजब नहीं बदल सकता। यह एक इंसानी तकाजा है लेकिन सराय खाम में कोई भी नहीं गया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा एक मिशन की तरह हमें रोकने का काम किया जा रहा है।
दूसरी ओर मुन्तखब अहमद नूर ने भी प्रेस को जारी बयान में कहा है कि न तो सरायखाम गया और न ही वहां नारेबाजी हुई। यह अफवाह जिसने भी फैलाई, हम उसकी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि सकलैनियों का ऐसे किसी फिरके से कोई ताल्लुक नहीं, जो ओलिया ए इकराम और रसूले करीम के गुस्ताख हैं। हम विल्लाही सुन्नी सही उल अकीदा मुसलमान हैं और अपने बुजुर्गों से मुतमईन हैं। डंके की चोट पर कहते हैं कि गैर सुन्नी चाहे वह देवबंदी हो या अहले हदीस और अहले कुरान, सब को गैर हक पर मानते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा मजहब मसलक वही है जो बुजुर्गाने दीन हुजूर गौसे ए पाक ख्वाजा गरीब नवाज, हजरत बसीर मिया, हजरत शराफत मिया और फाजिले बरेलवी का है। इसके खिलाफ कोई कुछ भी कहता है तो उससे हमारा कोई ताल्लुक नहीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सकलैनी अगल से न कोई बिरादरी है और न ही समाज से है। जैसे लोग अपने आप को कहीं की निसबत की वजह से कादरी, चिश्ची, निजामी, साबिरी, रजवी और वारिसी कहते हैं, उसी तरह सकलैनी हैं।