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बिना पैर वाले को खूब दौड़ाया, अब घर पहुंचे जब साहब ने हड़काया

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बरेली। जिस किसान देवेंद्र को दोनों पैर खराब होने के बावजूद किसान सम्मान निधि के लिए सिस्टम आठ महीने से इधर-उधर दौड़ा रहा था, शनिवार को अमर उजाला में उसकी बेबसी की खबर छपते ही अफसर हरकत में आ गए। छानबीन की गई तो पता चला है कि सम्मान निधि की धनराशि दिव्यांग के बजाय दूसरे खाते में भेजी जा रही है। तहसीलदार ने कृषि विभाग के एसडीओ से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि यह गलती शासन स्तर से दुरुस्त होगी। इसके बाद आनन-फानन में देवेंद्र के घर लेखपाल को भेजा गया और जरूरी कागज मंगाकर कार्रवाई शुरू कर दी गई।
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सीबीगंज के बहजुइया जागीर के रहने वाले देवेंद्र के मां-बाप नहीं हैं। केवल तीन बीघा खेती और छोटी सी परचून की दुकान से किसी तरह से गुजरा हो रहा है। उन्होंने आठ महीने पहले किसान सम्मान निधि के तहत मिलने वाले छह हजार रुपये के लिए फरवरी में ऑनलाइन फार्म भरा, लेकिन उसमें उनका खाता नंबर गलत फीड कर दिया गया। चल-फिर पाने में अक्षम होने के बावजूद वह तहसील और कलक्ट्रेट के आठ महीने से चक्कर काट रहा था। सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता सामने आने के बाद शनिवार को तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने एक लेखपाल को मदद के लिए दिव्यांग के घर भेजा था। इसके अलावा उन्होंने कृषि विभाग की एसडीओ रश्मि से पूछताछ की तो पता चला कि खाता नंबर गलत होने से दूसरे खाते में धनराशि ट्रांसफर हो रही है। उन्होंने बताया कि इस खामी को ठीक कराने के लिए शासन को लिखा पढ़ी की जा चुकी है।

सम्मान निधि पर डीएम ने भी लगाई क्लास
बरेली। किसान सम्मान निधि के मामले में डीएम नितीश कुमार ने भी अफसरों की शनिवार को क्लास लगाई। डाटा फीडिंग में गड़बड़ियां निकलने पर डीएम ने अफसरों को सारा डाटा चेक करने के निर्देश दिए। छूटे गरीब किसानों के रिकार्ड चेक करके खामियों को ठीक कराने को कहा। खतौनियां देखकर कब्जे हटाने और तालाब-खेल के मैदानों का जीर्णोद्घार कराने पर भी जोर दिया।
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कलक्ट्रेट सभागार में विकास कार्यों की समीक्षा में डीएम का फोकस किसान सम्मान निधि की गड़बड़ियों पर रहा। एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देशित किया कि तालाब और खेल के मैदान विकसित नहीं किए जा रहे जबकि मनरेगा में इन दोनों ही कामों के लिए पर्याप्त बजट हैं। उन्होंने चिह्नित सरकारी जमीनों के लिए भी कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
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