बरेली। डेढ़ करोड़ की लागत से एक ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक छह साल पहले परसाखेड़ा में बना लेकिन उसे इस्तेमाल करने के बजाय सिविल लाइंस में विकास भवन के पीछे चार करोड़ लागत से एक और ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनवा दिया गया। मई में सिविल लाइंस में ड्राइविंग टेस्ट शुरू हुए लेकिन महीने भर के अंदर ही अब इसे बंद करने की तैयारी है। जल्द परसाखेड़ा में ड्राइविंग टेस्ट कराने का फैसला लिया गया है।
अफसरों के इस फैसले से सिविल लाइंस में ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक बनाने पर चार करोड़ रुपये का खर्च व्यर्थ हो गया है। महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आरटीओ का मुख्य कार्यालय नकटिया में किराए की इमारत में चल रहा है। परसाखेड़ा में जहां ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक (एडीटीटी) बना है, वहां विभाग के स्वामित्व में काफी जमीन है। लिहाजा सिविल लाइंस में ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक (डीटीटी) बनवाने के बजाय पैसे का बेहतर उपयोग आरटीओ का अपना कार्यालय बनवाकर किया जा सकता था लेकिन न विभाग ने इस पर ध्यान दिया, न ही शासन ने।
आरटीओ अफसरों के महीने भर के अंदर ड्राइविंग टेस्ट सिविल लाइंस में कराने के फैसला बदल देने पर भी सवाल उठ रहे हैं। चार मई को ही सिविल लाइंस के डीटीटी पर ड्राइविंग टेस्ट शुरू कराने के साथ लाइसेंस विभाग को नकटिया से यहां शिफ्ट किया गया था। इसी दौरान परसाखेड़ा में सालों से बेकार पड़े एडीटीटी को भी शुरू करने की कवायद भी शुरू कर दी गई। अब फैसला लिया गया है कि ड्राइविंग टेस्ट परसाखेड़ा में ही कराए जाएंगे। जल्द ही इस फैसले को लागू करने की तैयारी है। यानी डीटीटी बनवाने पर चार करोड़ रुपये बेवजह फूंक दिए गए।
तीन हिस्सों में बंटा आरटीओ खोलेगा दलालों
के रास्ते, लोगों को लगानी पड़ेगी लंबी दौड़
कुछ साल पहले सरकार ने सारी जनसुविधाएं एक छत के नीचे देने का फैसला कर ज्यादा से ज्यादा विभागों को एक कैंपस में लाना शुरू किया था लेकिन नए फैसले से आरटीओ कार्यालय तीन हिस्सों में बंट गया है। मुख्य आरटीओ कार्यालय नकटिया में किराए की इमारत में चल रहा है। ड्राइविंग टेस्ट के साथ लाइसेंस अब परसाखेड़ा एडीटीटी में बनाए जाएंगे, लेकिन बायोमेट्रिक के लिए आवेदकों को सिविल लाइंस में बनी डीटीटी की बिल्डिंग में आना पड़ेगा। ज्यादा बेहतर होता कि सिविल लाइंस में विकास भवन के पीछे डीटीटी बनाने के बजाय इसी पैसे से परसाखेड़ा में अपनी जमीन पर मुख्य आरटीओ कार्यालय की अपनी बिल्डिंग बनाई जाती लेकिन ऐसा नहीं किया गया। चूंकि ड्राइविंग टेस्ट के लिए आवेदकों को परसाखेड़ा एडीटीटी जाना होगा और विभागीय अधिकारी नकटिया और सिविल लाइंस के डीटीटी भवन में बैठेंगे इसलिए यह भी माना जा रहा है कि दलाल इसका भरपूर फायदा उठाएंगे।
एडीटीटी से चोरी हो गया था लाखों का सामान
परसाखेड़ा में पांच हजार वर्ग मीटर जमीन पर 2016 में डेढ़ करोड़ की लागत से एडीटीटी बना था जिसके सालों तक बंद पड़े रहने की वजह से चोर हाईटेक टेस्टिंग ट्रैक पर लगे सेंसर, एलईडी समेत लाखों का सामान चुरा ले गए। एडीटीटी की बिल्डिंग भी इन सालों में खंडहर बन गई। इसी बीच अफसरों ने डीटीआई का प्रस्ताव मंजूर कराकर चार करोड़ की लागत से उसकी इमारत खड़ी कर दी।
हाईटेक ट्रैक है एडीटीटी
बरेली में बना एडीटीटी प्रदेश का दूसरा हाईटेक टेस्टिंग ट्रैक है। जिसमें एच, ऑफ, एस, पार्किंग, यूटर्न, आठ, जेब्रा क्रॉसिंग, प्रमुख ट्रैफिक सिग्नल बनाए गए हैं। सभी जगह सेंसर लगे हैं जिन्हें कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है। बरेली से पहले कानपुर में एडीटीटी टेस्टिंग ट्रैक बनाया गया था।
एक सप्ताह में परसाखेड़ा के एडीटीटी पर ड्राइविंग टेस्ट शुरू हो जाएगा। इसके बाद डीटीआई में ड्राइविंग टेस्ट नहीं होगा। इस बिल्डिंग में सिर्फ बायोमेट्रिक का काम चलता रहेगा। आवेदक यहां टेस्ट में पास होने के बाद बायोमेट्रिक कराने के लिए आएंगे। - मानवेंद्र सिंह, आरआई