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बिना पंजीकरण के डेढ़ हजार ई रिक्शा बने मुसीबत

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जाम की बनते हैं वजह, हादसे के बाद नहीं मिलता क्लेम, एसपी यातायात ने चिंता जताई
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कोरोना काल में लोगों की आजीविका का साधन बने ई रिक्शा तो बढ़ी तादाद

बरेली। शहर में बिना पंजीकरण के 1500 ई रिक्शा मुसीबत बन गए हैं। जाम की वजह बनने वाले इन ई रिक्शा से एक्सीडेंट होने पर संबंधित यात्रियों को क्लेम तक नहीं मिल पाती। एसपी यातायात ने इस बारे में नगर निगम अधिकारियों को पत्र लिखा है।
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पहले से ही शहर में बड़ी संख्या में ई रिक्शा हैं। करीब साढ़े तीन हजार ई रिक्शा परिवहन विभाग से पंजीकृत हैं और उन पर वाहन नंबर भी पड़े हुए हैं। जबकि करीब डेढ़ हजार ई रिक्शा बिना नंबर के ही चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश ई रिक्शा नगर निगम ने काफी समय पहले ई वाहन के तौर पर आवंटित किए गए हैं। यह वाहन उस वक्त गरीब परिवारों की रोजी रोटी का जरिया बने थे। कोरोना और लॉकडाउन के दिनों में जहां टेंपो बंद रहे वहीं ई रिक्शा चालकों ने पुलिस के डंडे खाकर भी इनके सहारे परिवार पाला। लॉकडाउन खत्म होते ही इनकी खरीद फरोख्त भी तेजी से शुरू हुई। अब फिर से इनकी संख्या बेतहाशा बढ़ गई है। ई रिक्शा शहर के चौराहों से लेकर तंग गलियों तक जाम की वजह बन रहे हैं। इस बारे में एसपी यातायात ने नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजकर बताया है कि वह पंजीकरण की व्यवस्था कराएं।

सीज कर पुलिस लाइन में खड़े कराए ई रिक्शा

डेढ़ महीने पहले एसपी यातायात ने बिना पंजीकरण वाले ई रिक्शा के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की थी। सौ से ज्यादा ई रिक्शा इस दौरान सीज किए गए थे। चूंकि इनका कोई नंबर या कागजात नहीं था तो पुलिस ने इन्हें छोड़ने से मना कर दिया था। परेशान ई रिक्शा वालों ने वाहन खरीद के कागजात कोर्ट में प्रस्तुत कर अन्य दलीलें दीं तो इनमें से कुछ को छोड़ने का आदेश हुआ। हालांकि समय रहते पंजीकरण कराने को भी चेताया गया पर अभी तक पंजीकरण नहीं कराया जा सका है। कानूनी पेचीदगी इसमें आड़े आ रही है।

दुर्घटना बीमा का नहीं मिलता लाभ

कानूनी जानकारों के मुताबिक बिना पंजीकरण वाले वाहन से कोई हादसा होने पर वाहन स्वामी या यात्री को वाहन बीमा का लाभ नहीं मिल पाता। वाहन के खिलाफ रिपोर्ट करने में पुलिस को अड़चन आती है। इस वाहन की टक्कर से क्षतिग्रस्त होने वाले दूसरे वाहनों और उनके मालिकों के सामने भी इसी तरह की समस्या आती है।

‘बिना पंजीकरण के ई रिक्शा परेशानी का सबब बने हैं। नगर निगम के साथ ही परिवहन विभाग के अधिकारियों से भी इस संबंध में विमर्श किया जा रहा है। वाहनों का पंजीकरण कराने पर जोर दे रहे हैं।’- संजीव कुमार बाजपेई, एसपी यातायात

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