बरेली। इंदौर की तर्ज पर शहर में जलनिकासी की व्यवस्था करने की तैयारी है। जल निगम की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन डिवीजन ने निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे हैं। प्रस्तावों का अध्ययन करने के बाद किसी एक कंपनी को जिम्मेदारी दी जाएगी। जिसे जिम्मेदारी मिलेगी, उसे चार महीने में मास्टर प्लान तैयार करना होगा। उसी प्लान के अनुरूप शासन से जल निकासी की परियोजना के लिए मंजूरी ली जाएगी।
एकीकृत वर्षा जल निकासी मास्टर प्लान के लिए जल निगम की कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन डिवीजन ने टेंडर निकाले हैं। इसमें मास्टर प्लान बनाने का अनुभव रखने वाली कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। वह टेंडर सात मार्च को खुलेगा। इसमें जो फर्में उपयुक्त मिलेंगी, उनकी वित्तीय बिड खुलेगी। तुलनात्मक रूप से न्यूनतम दर वाली फर्म को जिम्मेदारी मिलेगी। कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन डिवीजन के परियोजना निदेशक रघुवंश राम ने बताया कि 2031 की महायोजना में 501.72 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जल निकासी के लिए मास्टर प्लान बनेगा। इसमें नगर निगम का 106 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल शामिल है। यह महायोजना बनने के बाद जल निकासी की परियोजनाओं पर चरणबद्ध तरीके से काम होगा और भविष्य में लोगों को जलभराव की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा।
क्यों बनी योजना
एक जगह जलभराव रोकने के लिए नाला निर्माण करते हैं तो दूसरी जगह जलभराव शुरू हो जाता है। शहर में पानी का ढलान किस ओर है? कहां किस तरह से नाले बनाए जाएं कि जलभराव न होने पाए। इस पर अब तक समग्र तरीके से कोई काम नहीं हुआ। इसके विपरीत इंदौर में मास्टर प्लान के आधार पर जल निकासी का सिस्टम विकसित किया गया है। शासन ने इस बात को महसूस किया और प्रदेश के नगर निगमों के लिए महायोजना बनाई जाय। महायोजना के लिए नौ करोड़ रुपये का बजट नगर आयुक्त ने शासन से मांगा था। शासन ने कहा कि पहले रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) प्राप्त कर लें। निजी कंपनियों से ही पूछें कि कितनी लागत में वह मास्टर प्लान बनाकर देंगे। उसके बाद बजट जारी होगा। अमर उजाला ब्यूरो
अबकी बारिश में जलभराव से होकर ही निकलेंगे लोग
शहर में मास्टर प्लान लागू करने की तैयारी है लेकिन जलभराव की समस्या नहीं दूर हो रही है। अगले एक साल तक जलभराव की समस्या रहेगी। ज्यादा समस्या हजियापुर, मुंशीनगर और कर्मचारी नगर में है। सिकलापुर में आजाद मंदिर वाली गली तो ऐसी है जहां बिन बारिश ही जलभराव होता है। पार्षद जयप्रकाश बार-बार शिकायत कर रहे हैं। जनसुनवाई पोर्टल पर नागरिकों ने भी शिकायत की लेकिन अब तक जल निकासी का इंतजाम नहीं हो सका। अब इससे राहत देने की तैयारी है लेकिन चार महीने सर्वेक्षण में लग जाएंगे। उसके बाद प्रस्तावित नालों के कार्यों के टेंडर और फिर निर्माण में कम से कम तीन महीने लग जाएंगे। इस तरह इस साल की आने वाली बारिश में मुसीबत झेलने की मजबूरी सामने है।