रबर फैक्टरी के लिए राज्य सरकार ने जिन शर्तों पर जमीन दी थी, उनके मुताबिक फैक्टरी बंद होने के बाद जमीन पर फिर राज्य सरकार का स्वामित्व स्थापित होना चाहिए था लेकिन फिर भी यह जमीन सरकार के हाथों से आखिर निकल ही गई।
21 साल पहले फैक्टरी बंद होने के बाद अब तक सरकार का नीचे से ऊपर तक का तंत्र सोता रहा। अदालत में पैरवी के बजाय कागजी खानापूर्ती से काम चलाया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सोमवार तक फैक्टरी की जमीन के साथ सारी संपत्तियों को अल केमिस्ट कंपनी के सुपुर्द किया जाना है। इससे ऐन पहले प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया कि रबर फैक्टरी प्रकरण से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
सरकार की मंशा रबर फैक्टरी की जमीन को दोबारा अपने स्वामित्व में लेकर उसे औद्योगिक तौर पर विकसित करने की थी लेकिन फिर भी अफसरों ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। दो महीने पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैक्टरी की जमीन और संपत्तियों को निजी कंपनी अल केमिस्ट को सौंपने का आदेश दिया, उसके बाद भी अफसर नहीं जागे।
शासन और प्रशासन की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में पक्ष रखने तक कोई नहीं पहुंचा। तीन महीने पहले राज्य सरकार की ओर से रबर फैक्टरी की जमीन को अपने स्वामित्व में लेने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए विशेष सचिव मुथुकुमार स्वामी को नोडल अधिकारी नामित किया था, लेकिन मुथुकुमार ने इस प्रकरण की कानूनी स्थिति जानने तक में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
अब बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सोमवार को रबर फैक्टरी की जमीन समेत सारी संपत्तियां अल केमिस्ट कंपनी के सुपुर्द किए जाने की समय सीमा का आखिरी दिन है। माना जा रहा है कि इसके बाद राज्य सरकार की ओर से इस मामले में कानूनी तौर पर पैरवी का रास्ता बंद भले न हो, लेकिन और मुश्किल हो जाएगा।
संतोष गंगवार नाराज, मुख्यमंत्री को लिखा- अफसरों पर कार्रवाई करें
शासन के आदेश के बावजूद विशेष सचिव मुथुकुमार स्वामी की ओर से इस प्रकरण में कोई पैरवी न करने का संज्ञान मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया है। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर रब फैक्टरी प्रकरण में लापरवाही दिखाने वाले अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश की है। उन्होंने इस बारे में यूपीसीडा, कमिश्नर और डीएम को भी पत्र लिखा है। उधर, अल केमिस्ट कंपनी फैक्टरी की संपत्ति पर कब्जा लेने के लिए लगातार दबाव बनाए हुए है।