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अफसरों की समझ! सूदखोर ले रहे हैं जान मगर निशाने पर साहूकार

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रुपये गरीब - फोटो : pixabay
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शाहजहांपुर में दवा व्यापारी के परिवार समेत की खुदकुशी करने के बाद साहूकारी के 200 से ज्यादा लाइसेंस निरस्त किए
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सूदखोरी के मामले में पुलिस ने सिर्फ एक आरोपी को जेल भेजा

बरेली। सूदखोरों ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है लेकिन अफसर उन पर शिकंजा कसने के नाम पर साहूकारी के लाइसेंस निरस्त करके रस्मअदायगी कर रहे हैं। हाल ही में सूदखोरों के चंगुल में फंसकर कई लोगों के जान गंवा देने के बावजूद सिर्फ एक आरोपी को पुलिस जेल भेज पाई लेकिन साहूकारी के दो सौ से ज्यादा लाइसेंस निरस्त कर दिए गए।
तय नियमों से ज्यादा ब्याज वसूलने वालों पर उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम 1976 की धारा 22 के तहत रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इसके तहत छह महीने की सजा या पांच हजार रुपये जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है। उत्पीड़न करने का मामला हो तो इसी अधिनियम की धारा 23 के तहत भी कार्रवाई होती है, जिसमें तीन महीने की कैद या पांच सौ रुपये जुर्माना या दोनों हो सकती हैं। इन दोनों ही धाराओं में सात साल से कम सजा होने के कारण पुलिस सूदखोरों को सिर्फ नोटिस देकर छोड़ देती है। फिर कोर्ट में कार्रवाई चलती रहती है और सूदखोर मनमानी करते रहते हैं।
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पिछले दिनों शाहजहांपुर में मूलरूप से फरीदपुर के रहने वाले दवा व्यापारी अखिलेश गुप्ता ने अपनी पत्नी रेशु, बेटा शिवांग और बेटी अर्चिता के साथ खुदकुशी कर ली थी। अखिलेश गुप्ता भी सूदखोर के उत्पीड़न से त्रस्त थे। इस मामले की गूंज शासन तक पहुंची थी लेकिन इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने सूदखोरों पर कड़ी कार्रवाई के बजाय दो सौ से ज्यादा साहूकारी के लाइसेंस निरस्त कर दिए।

अब फिर अवैध साहूकारों पर कार्रवाई के निर्देश

बरेली। सूदखोरों का आतंक बढ़ने के बाद अब जिला प्रशासन ने सभी एसडीएम, डिप्टी रजिस्ट्रार और तहसीलदारों को अपने-अपने क्षेत्र में अवैध साहूकारों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पंजीकृत साहूकारों के बारे में भी छानबीन कर उनके कारोबार की रिपोर्ट बनाई जाएगी। किसी सूदखोर की शिकायत मिलने पर प्रभावी कार्रवाई के लिए अलग शिकायत पंजिका बनाने को कहा गया है।
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उप्र साहूकारी विनियमन रजिस्ट्रार व एडीएम एफआर मनोज कुमार पांडेय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कोरोना महामारी में अराजक और असामाजिक तत्व बगैर लाइसेंस के अप्रासंगिक शर्तों पर अवैध साहूकारी कर रहे हैं और लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। ऐसे में सभी एसडीएम, उप रजिस्ट्रार, तहसीलदार को अपनी तहसील में पड़ने वाले पंजीकृत साहूकारों के बारे में छानबीन करें। किसी असामाजिक गतिविधि या नियमविरुद्ध कार्य पर उप्र साहूकारी विनियमन अधिनियम 1976 के तहत कार्रवाई की जाए। अवैध व्यवसाय करने वालों की पड़ताल कर उन पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। ब्यूरो

बढ़ती जा रही है जान गंवाने वालों की तादाद

  • 20 मार्च : प्रेमनगर के मोहल्ला भूड़ में रहने वाले डिग्री कॉलेज के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अरुण कुमार को सूदखोरों ने बच्चों के सामने अपमानित किया तो उन्होंने जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी।
  • 07 जून: फरीदपुर के मूल निवासी दवा करोबारी अखिलेश गुप्ता ने शाहजहांपुर में सूदखोर से त्रस्त होकर अपनी पत्नी रेशू और बेटे शिवांग व बेटी अर्चिता के साथ खुदकुशी कर ली।
  • 12 जून : सुभाषनगर निवासी कन्फेक्शनरी सेल्समैन संजीव ने सूदखोर और वितरकों के बकाए से त्रस्त होकर खुदकुशी कर ली।
  • 29 जून : सूदखोर के उत्पीड़न और अपमान से त्रस्त होकर राजेंद्रनगर के ट्रांसपोर्टर की बेटी ने खुदकुशी की कोशिश की।
  • अगस्त 2018 : फरीदपुर में सूदखोरों से त्रस्त फर्रखपुर निवासी नीरज ने ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली।
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