अफसरों के मुताबिक, कब्जेदार पहुंचे कोर्ट, तीन मार्च को सुनवाई बाद होगी कार्रवाई
बरेली। ‘बरेली रजवाह’ नहर को कब्जेदारों से मुक्त कराने का दावा करने वाले अफसर अब बैकफुट पर आ गए हैं। बुधवार को पीलीभीत बाईपास स्थित एक बरातघर और स्विमिंग पूल पर जेसीबी गरजनी थी, लेकिन कब्जेदारों के कोर्ट पहुंचने के चलते नहर विभाग की ओर से की गईं तैयारियां धरी की धरी रह गईं। अफसरों का दावा है कि कब्जेदारों की ओर से कोर्ट में दायर वाद पर तीन मार्च को सुनवाई होगी। कोर्ट का फैसला पक्ष में आने के बाद अगले दिन यानी चार मार्च को ध्वस्तीकरण अभियान शुरू होगा।
शहर के बीच से गुजरने वाली 55 फुट चौड़ी बरेली रजवाह को पाटकर उस पर कई कॉलोनियां खड़ी कर दी गईं। माफिया से मिलीभगत की वजह से बीडीए ने भी नहर की जमीन पर बनीं दो कॉलोनियों को पास कर दिया। बीडीए से मंजूरी मिलने के बाद कॉलोनाइजर ने करोड़ों की कीमत के प्लॉट आसानी से बेच डाले। अब कई सालों बाद एक बार फिर नहर की जमीन पर हुए कब्जों को हटाने का हल्ला मचने से कब्जेदार भी एक बारगी सहम गए हैं।
वहीं पिछले दिनों कुसुमनगर कॉलोनी स्थित एक स्विमिंग पूल पर कार्रवाई को दलबल पहुंचे नहर विभाग के अफसर दीवारों पर खरोंचे मारकर लौटे और पूल को ध्वस्त करने का हल्ला मचा दिया। इसके बाद अमर उजाला ने कार्रवाई की पोल खोली तो अफसर सफाई देने में जुट गए। फजीहत होने के बाद अफसरों ने 26 फरवरी को स्विमिंग पूल समेत पीलीभीत बाईपास स्थित बरातघर और बाउंड्रीवाल को ध्वस्त करने का एक्शन प्लान बनाया, जिसकी जानकारी होते ही कब्जेदार कोर्ट पहुंच गए। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होती इससे पहले ही लीगल नोटिस विभाग में पहुंच गया, जिसमें कोर्ट ने सुनवाई होने तक कार्रवाई रोकने को कहा है।
लीगल नोटिस जारी होने की वजह से अवैध कब्जों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। अवैध कब्जों पर कार्रवाई की पूरी तैयारी कर ली गई है। तीन मार्च को कोर्ट में सुनवाई है, फैसला पक्ष में आया तो चार मार्च को ध्वस्तीकरण अभियान शुरू होगा।
- एसएस यादव, एक्सईएन, रुहेलखंड नहर विभाग