रामलीला के लिए टाल दिया निकाह
रामलीला में 1997 से भगवान परशुराम का किरदार निभा रहे रंगकर्मी अरशद आजाद कहते हैं कि पूर्वाभ्यास से लेकर मंचन समाप्ति तक पूर्ण सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं। वह बताते हैं कि शुरुआत में कुछ लोगों ने रामलीला मंचन करने पर आपत्ति भी जताई। इसके बावजूद परिवार का पूरा समर्थन मिलता रहा। 2001 में उनका निकाह अक्तूबर के महीने में तय किया गया। इस पर उनकी मां ने आपत्ति जताई। कहा कि बेटे को रामलीला मंचन करना है। इसके बाद फरवरी में निकाह हुआ।
जब बीमार दादी ने कहा- मंचन मत छोड़ो
श्रीरामलीला के सहायक निर्देशक और मंच संचालक मोहम्मद सुहेल इस बार राजा जनक का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वाभ्यास शुरू होने से लेकर शांति मंगल यज्ञ तक जीवन पूर्ण सात्विक रहता है। 2019 में पहली बार विश्वामित्र का किरदार निभाया था।
किरदार को जीवन में उतारने के लिए धर्म ग्रंथों का अध्ययन करते रहते हैं। गत वर्ष दादी के बीमार होने पर किरदार निभाने से मना कर दिया। दादी को पता चला तो उन्होंने कहा कि मंचन मत छोड़ो। श्रीरामलीला में किरदार निभाने से परिवार वाले भी खुश रहते हैं।
सात्विक बनने के लिए मांसाहार छोड़ा
ओसीएफ कर्मचारी पैट्रिक दास 1991 से रामलीला में विभिन्न किरदार निभाते आ रहे हैं। वह गत वर्ष तक रामलीला का निर्देशन भी करते रहे। विभीषण, जनक, रावण, मारीच, मेघनाद आदि की भूमिका निभा चुके पैट्रिक दास कहते हैं कि उनके जीवन में भी राम के आदर्शों का पूरा असर पड़ा। सात्विक बने रहने के लिए मांसाहार छोड़ दिया। सामान्य जीवन में होने वाली मानवीय गलतियों से भी बचने का प्रयास करते हैं। एक महीने तो पूरे आध्यात्मिक माहौल में रहते हैं।
असली नाम भूले...रिश्तेदार तक बुलाते हैं राम
रोहित सक्सेना 2014 से श्री राम का किरदार निभा रहे हैं। पेशे से टेलर रोहित कहते हैं कि श्रीराम के किरदार में आने के बाद जीवन पर बड़ा असर पड़ा और नई पहचान मिली। अब तो रिश्तेदार भी असली नाम की जगह राम ही बुलाते हैं। खानपान से लेकर आचार-विचार तक पूर्ण सात्विक हो गए हैं। मंचन के एक महीने के अलावा शेष समय भी भगवान राम के आदर्शों के पालन का प्रयास करने में बीतता है। उनकी बेटी का नाम सिया है तो बेटे का शिवाय।