डोहरा रोड पर नदी किनारे बन गए मकान, नए निर्माण के लिए हो रहा पटान, कभी स्वच्छ और अविरल थी धारा, नालों के जहर से अब पानी हुआ काला
बरेली। डोहरा रोड पर नकटिया नदी के दोनों पाट आपस में सिमट रहे हैं। कुछ लोग मिट्टी पाटकर मकान बनाने की तैयारी में हैं। करीब पंद्रह दिन से पटान चल रहा है। अलग-अलग समय में नदी के किनारे मकान भी बना लिए गए हैंं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूरी हुई। लिहाजा अवैध निर्माण करने वाले नदी की ओर बढ़ते गए। कभी तीस मीटर चौड़ी नदी, अब कई जगह नाले के आकार में आ गई है। नालों के जहर से अब इसका पानी भी काला हो गया है।
बहेड़ी क्षेत्र के दीननगर गांव से बरेली में बड़ा बाइपास के आगे तक नकटिया नदी है। नैनीताल रोड से बीसलपुर रोड तक नदी के करीब आठ किलोमीटर हिस्से में कई स्थानों पर अवैध कब्जे हैं। बृहस्पतिवार को इसकी पड़ताल की गई तो पता चला कि नदी के बगल में पटान किया जा रहा है। इससे स्वाभाविक जल प्रवाह बाधित होना तय है। पहले भी नदी के किनारे मिट्टी पाटकर मकान बनाए गए हैं। नदी में कारखानों और कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठानों का प्रदूषित पानी प्रवाहित होने से वह नाला बन गई है। काला पानी प्रदूषण की गवाही दे रहा है। प्रदूषण और अवैध कब्जे रोकने के लिए जिम्मेदारों ने प्रयास किए होते तो ये हाल नहीं होता।
विशेषज्ञ की राय
मैंने नदी के तीस किलोमीटर हिस्से का सर्वेक्षण किया है। हालात अच्छे नहीं है। यही हाल रहा है तो आने वाली पीढ़ी को क्या जवाब देंगे? रिमोट सेंसिंग सर्वे से दस साल पहले की इमेज देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि नदी तब कैसी थी और अब कैसी है? अवैध कब्जे सामने दिख रहे हैं। -डॉ. जसपाल सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, पर्यावरण विज्ञान विभाग, रुहेलखंड विश्वविद्यालय।
नदी क्षेत्र में अगर कहीं अवैध निर्माण हुआ है तो उसे चिह्नित करके कार्रवाई की जाएगी। मैं खुद मौके की स्थिति को देखने के लिए जाऊंगा।- मनिकंडन ए. उपाध्यक्ष बीडीए
ये प्रसास जरूरी
- नदी के रकबे को चिह्नित कर अवैध कब्जे हटाए जाएं। नालों का पानी नदी में गिरने से रोका जाए।
- नदी के रकबे को सुरक्षित करने के लिए जागरूक लोगों की कमेटियां गठित हों।
- अगर किसी के क्षेत्र में अवैध कब्जे हों तो संबंधित की जिम्मेदारी तय की जाए।
अमर उजाला ब्यूरो