बरेली। सावन 30 जुलाई से शुरू होगा। इस दौरान शहर से लाखों कांवड़ियों की आवाजाही होगी। सावन के बीच में ही आला हजरत का उर्स प्रस्तावित है। इसमें भी देश-विदेश से लाखों जायरीन आते हैं। इतने बड़े धार्मिक आयोजनों से पहले शहर की मूलभूत व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। खस्ताहाल सड़कों पर जगह-जगह लटक रहे बिजली के तार, कमजोर खंभे श्रद्धालुओं और जायरीन की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। शनिवार को की गई पड़ताल में यह हकीकत सामने आई।
बिहारीपुर, चौकी चौराहा, चौपुला समेत अन्य मार्गों से होकर कांवड़िये और जायरीन गुजरेंगे। इन मार्गों पर लगे बिजली के खंभों को नीचे से प्लास्टिक लगाकर कवर नहीं किया गया है। अगर बारिश के चलते इन मार्गों पर जलभराव होता है तो पानी में करंट उतरने की आशंका बनी रहेगी।
दरगाह की ओर जाने वाले मार्ग पर हर कदम पर खतरा
आला हजरत के तीन दिवसीय उर्स के दौरान सुबह से लेकर रात तक काफी संख्या में जायरीन का आवागमन होता रहता है, लेकिन दरगाह तक पहुंचने वाले मार्ग पर हर कदम पर खतरा मंडरा रहा है। एचटी लाइन के तार लटक रहे हैं। ट्रांसफार्मर का सुरक्षा घेरा तक नहीं बनाया गया है। उर्स के दौरान कई जुलूस भी निकलते हैं। यही मार्ग लाखों जायरीन की आवाजाही का केंद्र रहेगा। ऐसे में हादसे की आशंका बनी हुई है। बिहारी इलाके में इस्लामिया मैदान पर उर्स का आयोजन होता है। यहां लाखों जायरीन का जमावड़ा रहता है, लेकिन इस इलाके की सड़कों के किनारे लगे बिजली के खंभे जर्जर हो गए हैं। कई खंभे झुके हुए हैं तो कुछ नीचे से गलने के कारण गिरने की कगार पर हैं। अन्य स्थानों पर बेतरतीब एचटी लाइनें गुजर रही हैं।
शिवभक्तों की राह भी आसान नहीं
शहर के प्रमुख नाथ मंदिरों में शामिल तपेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए कांवड़ियों के कई जत्थे आते हैं। इस मार्ग पर जर्जर खंभे और ऊपर से गुजर रही एचटी लाइन बढ़ा खतरा साबित हो सकती है। इस मार्ग पर लगीं स्ट्रीट लाइटें भी खराब हैं। इससे रात में स्थिति और गंभीर हो सकती है। कई बार डाक कांवड़ लेकर भी जत्थे पहुंचते हैं। बड़े-बड़े डीजे सिस्टम की ऊंचाई काफी अधिक होती है। ऐसे में ये बेतरतीब एचटी लाइनें बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं। मिनी बाइपास से किला होते हुए चौपुला चौराहे की ओर कांवड़ियों के जत्थे रवाना होते हैं। इस बार इस राह में कई रोड़े हैं। सिटी स्टेशन से चौपुला चौराहे वाले मार्ग पर लाइन से लगे बिजली के खंभे झुक गए हैं। विद्युत निगम ने सपोर्ट लगाकर किसी तरह इनको रोक रखा है, लेकिन तेज हवा चलने पर ये कभी भी गिर सकते हैं। ऐसे में कांवड़ियों के लिए ये बड़ी परेशानी का सबब बन सकते हैं।