कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करता स्वास्थ्य कर्मी।
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कॉरपोरेट लैब की जांच में एक-एक कर कोरोना पॉजिटिव पाए गए चार लोगों को आईवीआरआई की लैब की जांच में निगेटिव बता दिए जाने पर असमंजस बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से लेकर निजी डॉक्टर तक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि किसकी रिपोर्ट सही है और किसकी गलत। लिहाजा अब कॉरपोरेट लैब की जांच में पॉजिटिव बताए गए लोगों की एक जांच केजीएमयू लखनऊ में भी कराने का फैसला लिया गया है।
पिछले एक हफ्ते में कॉरपोरेट लैब में अलग-अलग जांच के बाद जिन चार सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, उन्हें आईवीआरआई की जांच में निगेटिव करार दिया गया। एक के बाद एक चारों केस की रिपोर्ट में यह विरोधाभास सामने आने के बाद यहां से यह मामला पिछले दिनों शासन को रेफर कर दिया गया था।
इसके बाद लगातार यहां के अधिकारियों की सामने आते नए तथ्यों पर स्वास्थ्य महानिदेशालय के अफसरों से बात हो रही थी। सूत्रों के मुताबिक सोमवार को डीजी हेल्थ की ओर से बरेली के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे चारों मरीजों के सैंपल जांच के लिए केजीएमयू भिजवाएं ताकि यह पुष्टि हो सके कि आईवीआरआई और कॉरपोरेट लैब में से किसकी रिपोर्ट सही है और किसकी गलत।
हालांकि शाम को ही यह कहते हुए बरेली के चारों मरीजों के सैंपल केजीएमयू भिजवाने से रोक दिया गया कि कॉरपोरेट लैब में लखनऊ के जिन मरीजों को पॉजिटिव बताया गया है, पहले उनकी केजीएमयू में जांच कराई जाएगी। इसके बाद भी अगर कोई पुष्टि नहीं हो पाई तो बरेली से सैंपल मंगाए जाएंगे। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि डीजी हेल्थ के निर्देश पर चारों का सैंपल लिया जाना था लेकिन अब टाल दिया गया है। नए निर्देश आने के बाद कोई कार्रवाई की जाएगी।