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Bareilly News: अब और बेटियों का नहीं टूटेगा खिलाड़ी बनने का सपना

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बरेली। एथलीट बनाने का झांसा देकर किशोरी से दुष्कर्म करने की कोशिश करने वाला कोच साहिबे आलम सलाखों के पीछे पहुंच गया है। फिलहाल, उसे जिला जेल में रखा गया है। दोषी को सात साल की सजा होने के बाद पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद भले ही उसे ट्रैक छोड़ना पड़ गया, पर अब किसी और बेटी का सपना नहीं टूटेगा। तमाम दबाव झेलने के बावजूद वह न्याय के लिए छह साल तक संघर्ष करती रही।
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बरेली की रहने वाली किशोरी ने बताया कि वर्ष 2017 में कोच साहिबे आलम के साथ वह नैनीताल में एक प्रतियोगिता में शामिल होने गई थी। वहां कोच ने उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की थी। पीड़िता ने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो शहर के कई लोगों ने केस वापस लेने का दबाव बनाया। धमकियां भी मिलीं। उसके चरित्र पर भी सवाल उठाए गए। उसके खिलाफ केस भी दर्ज कराया गया। इस बीच पीड़िता की मां का भी निधन हो गया। उसका मनोबल टूटने लगा तो पिता ने संबल दिया। उन्हीं की पैरवी की वजह से कोच साहिबे आलम को सात साल की सजा सुनाई जा सकी।
परिजनों को नहीं बताया तो बढ़ी कोच की हिम्मत
पीड़िता के अनुसार घटना 27 अगस्त 2017 की नैनीताल के एक होटल की है। कोच उसको प्रतियोगिता में प्रतिभाग कराने वहां ले गया था। प्रतियोगिता के बाद होटल में उससे अश्लील हरकतें की थी। पीड़िता ने डर के कारण पहले परिजनों को नहीं बताया। इससे कोच की हिम्मत बढ़ गई। वह रोजाना हरकतें करने लगा। एक दिन हिम्मत कर उसने मां को पूरी बात बताई तो पिता ने चार जनवरी 2018 को रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसके बाद किशोरी ने स्टेडियम जाना छोड़ दिया। तमाम संघर्षों के बाद उसका विवाह हो गया तो न्याय की उम्मीद टूट गई, लेकिन पिता ने पैरवी जारी रखी। इसी वजह से न्याय मिल सका।
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दूसरी पीड़िता को भी जगी उम्मीद
कोच साहिबे आलम को सजा मिलने के बाद अब दूसरी पीड़िता को भी न्याय की उम्मीद जग गई है। उसने बताया कि मेरी मां की ओर से पैरवी की जा रही है। दबाव बनाने के लिए दोषी के भाई ने फर्जी मुकदमे कराए, लेकिन मैं सही हूं और मुझे न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है। संवाद
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