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अब बदला सैंपलिंग इंचार्ज... यह फैसला पहले लिया होता तो कुछ और बात होती

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एंटीजन किट की जांच करती टीम। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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जब जिले में कोरोना चरम पर था तो 15 दिन बाद भी नहीं मिल रही थी रिपोर्ट, अब हालात कुछ काबू में तो लिया निर्णय

बरेली। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की ओर से मंगलवार को खबर जारी की गई कि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट समय पर दे पाने में नाकाम हो रहे सैंपलिंग इंचार्ज को बदल दिया गया है लेकिन इस पर न सिर्फ सवाल उठ रहा है कि बल्कि इसे वक्त और जरूरत के मुताबिक लिया गया फैसला भी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इंचार्ज को बदलने की जरूरत तो पिछले महीने उस वक्त थी जब एक-एक दिन में डेढ़-डेढ़ हजार केस आ रहे थे लेकिन उसे बदला तब गया जब ये केस घटकर सौ और सवा सौ तक रह गए।
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आरटीपीसीआर सैंपलिंग का प्रभारी अब डॉ. सीपी सिंह को बनाया गया है लेकिन यह तब हुआ है जब इस लैब की चुनौती काफी हद तक खत्म हो चुकी है। मार्च और अप्रैल के महीने में जब जिले में कोरोना अपने चरम पर था, तब न पर्याप्त संख्या में सैंपल हो पा रहे थे और न ही उनकी जांच। खासतौर पर आरटीपीसीआर की रिपोर्ट आने का समय बढ़ते-बढ़ते इतना ज्यादा पहुंच गया था कि कोरोना के संक्रमित रिपोर्ट आने से पहले ही या तो स्वस्थ हो जा रहे थे या फिर दम तोड़ दे रहे थे। सैंपलिंग इंचार्ज बदलकर हालात को काबू में लाने का दावा कर रहे अफसर उस वक्त इस पूरे हालात के मूक दर्शक बने हुए थे। लैब में उस वक्त न स्टाफ बढ़ाया गया न इंचार्ज को बदला गया।
हालात यहां तक गंभीर हो गए थे कि एशिया के प्रख्यात वन्यजीव विशेषज्ञ एवं आईवीआरआई के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. वीएम अरोरा को भी 10 दिन से ज्यादा समय तक अपनी आरटीपीसीआर रिपोर्ट न आने पर मुख्यमंत्री से शिकायत करनी पड़ी थी। आखिरकार उनकी मौत भी हो गई। आम लोगों का गुस्सा भी हर झलक रहा था। आए दिन कोविड अस्पताल के स्टाफ और अफसरों से लोगों की नोंकझोंक हो रही थी। तमाम लोगों ने ट्वीटर पर मुख्यमंत्री से भी इसकी शिकायत की। शासन ने समस्या को दूर करने के निर्देश दिए थे।

सिर्फ इंचार्ज बदलने भर से दुगनी हो गई लैब की क्षमता

फेरबदल होते ही 9315 सैंपल की जांच रिपोर्ट जारी
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पिछले दिनों आरटीपीसीआर, ट्रूनेट, एंटीजन किट से जांच रिपोर्ट मिलने का औसत प्रतिदिन तीन से पांच हजार तक था। अब प्रभार बदला तो एक ही दिन में सैंपलिंग और जांच रिपोर्ट मिलने में करीब चार हजार का रिकॉर्ड उछाल हुआ है। रिकॉर्ड के मुताबिक चार दिन के आंकड़े क्रमश: 5545, 8043, 7380, 9315 सैंपल की रिपोर्ट जारी होने के हैं जिन्हें शासन को भेज दिया गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर पुराने इंचार्ज अक्षम थे तो उन्हें पहले क्यों नहीं बदला गया। अगर जानबूझकर गड़बड़ी कर रहे थे तो उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
नए प्रभारी ने कहा- महामारी में सर्वोत्तम काम करें
डिप्टी एसीएमओ डॉ. सीपी सिंह ने बताया कि उन्होंने सभी सीएचसी, पीएचसी, फ्लू कॉर्नर और जांच कर रही टीमों से मीटिंग कर उन्हें महामारी में सर्वोत्तम कार्य करने का सुझाव दिया। एक जांच रिपोर्ट समय से न मिलने से क्या दिक्कत हो सकती है उसकी जानकारी दी। केंद्र की निगरानी कर रहे हैं। टीम को भरपूर किट दी जा रही है ताकि ज्यादा सैंपलिंग हो और संक्रमितों को तेजी से ट्रेस कर संक्रमण की चेन को तोड़ने में मदद मिल सके।

20 दिन में भी नहीं मिली आरटीपीसीआर रिपोर्ट

सारे लंबित सैंपल की रिपोर्ट जारी कर दिए जाने के दावे के उलट कई लोगों ने शिकायत की है कि स्वास्थ्य विभाग से उन्हें तीन हफ्ते बाद भी रिपोर्ट नहीं मिली है। गणेशपुरम की रहने वाली दीपाली गर्ग और पवन विहार में रहने वाली गायत्री गुप्ता के परिवार वालों के मुताबिक उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट बीस दिन बाद भी पोर्टल पर अपडेट नहीं हुई है। दोनों ने 29 अप्रैल को जांच के लिए बिथरी अस्पताल में सैंपल दिया था। 18 मई तक पोर्टल पर सैंपल नॉट रिसीव्ड का ही मेसेज आता रहा। ब्यूरो
जांच रिपोर्ट देर से आने की शिकायतें मिलने पर प्रभारी को हटाकर डिप्टी एसीएमओ डॉ. सीपी सिंह को जिम्मेदारी दी गई है। उनके निर्देशन में चार दिन के अंदर ही आरटीपीसीआर के सभी पेंडिंग सैंपल की जांच करा ली है। अब कोई आरटीपीसीआर सैंपल लंबित नहीं है। पहले बीएसएल लैब के कर्मचारी और डाटा ऑपरेटर संक्रमित हुए थे, इसकी वजह से जांच प्रक्रिया बाधित हुई। - डॉ. सुधीर गर्ग सीएमओ

अब एंटीजन किट भी सही नतीजा देगी

बरेली। स्वास्थ्य विभाग को अब जो एंटीजन किट दी गई है, उससे सही नतीजा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे पहले कोरोना के पीक के दौरान जिस एंटीजन किट से दस हजार सैंपलों की जांच की गई थी, वह सही नतीजा नहीं दे पाई थी। कहा जा रहा है कि मेडिकल कारपोरेशन ने इस बार कोरियन एसडी जांच किट की सप्लाई की है। उधर, पिछली एंटीजन किट की जांच के लिए मेडिकल कॉरपोरेशन के निर्देश पर बरेली पहुंची टीम ने लैब टेक्नीशियन को सैंपल की जांच करने का तरीका बताया।
पिछले साल कोविड-19 की शुरुआत में सैंपल की जांच के लिए आरटीपीसीआर और ट्रूनेट से ही जांच का विकल्प था। इसी दौरान कोरिया की कंपनी ने 95 परसेंट सेंसेटिव और प्रमाणिक जांच के लिए एंटीजन किट लांच की थी। जो जून जुलाई में बरेली पहुंची थी। किट से अधिकतम दो मिनट में ही परिणाम मिल जाते थे और कितना भी बफर यानी सैंपल किट में डाला जाए फिर भी परिणाम सामने आते थे। अफसरों ने बताया कि कोरियन किट से जांच परिणाम में अगर कोई संक्रमित मिला तो वह 95 परसेंट सटीक होता है। अब कारपोरेशन की ओर से भेजी गई इन किटों से जांच हो रही है जिसमें अब तक एक भी किट में बफर फैलने आदि कोई शिकायत नहीं मिली है।
लाइव प्रैक्टिकल से बताया जांच का तरीका
मंगलवार को हरियाणा से किट सप्लाई करने वाली फर्म की टीम जांच को पहुंची थी। सदस्य सैंकी ने सीएमओ से मुलाकात की और एसीएमओ डॉ. आरएन गिरी को भी जांच प्रक्रिया की जानकारी दी। दोपहर करीब तीन बजे तीन सौ बेड अस्पताल पहुंचकर उन्होंने मौजूद लैब टेक्नीशियन अनुज, सुमित आदि को प्रैक्टिकल कर जांच का तरीका बताया। जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की। जो शासन को भेजी जाएगी। लाइव प्रैक्टिकल के दौरान दिखाया कि दो बूंद जिस किट में डाली गई वहां परिणाम मिला और जहां तीन बूंद या अधिक डाला वहां बफर बिखर गया।

चार फर्म सप्लाई कर रही हैं एंटीजन किट

जानकारी के मुताबिक बरेली में चार फर्म एंटीजन किट की सप्लाई कर रही हैं। पिछले दिनों एक फर्म की सप्लाई हुई किट में परिणाम न मिलने पर फजीहत होने के बाद अफसरों ने सभी किट सप्लायर को ट्रेनर भेजकर उससे जांच का तरीका बताने को कहा है। क्योंकि अब नई आरएनडी की किटें सप्लाई हो रही हैँ जो वायरस की नई स्ट्रेन को जांच करने में सक्षम हैं और जांच का तरीका भी अलग है। कहीं कोई शिकायत न रहे इसके लिए प्रशिक्षण देने को कहा है।

किट में सटीक परिणाम न मिलने की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई थी। मेडिकल कारपोरेशन के निर्देश पर किट सप्लाई करने वाली फर्म के ट्रेनर पहुंचे और उन्होंने जांच का तरीका बताया। उधर, जो नई किट अब मिली है उसमें किसी तरह की कोई शिकायत अभी नहीं मिली है। - डॉ. सुधीर गर्ग, सीएमओ

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