बरेली। झोलाछाप पर प्रभावी अंकुश लगाने में जिम्मेदारों की नाकामी से एक युवक की जान सांसत में है। बरेली, मेरठ, दिल्ली के चिकित्सकों ने इलाज से हाथ खड़े कर दिए। विभागीय कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित है। बीते छह माह में एक भी झोलाछाप पर रिपोर्ट नहीं कराई गई है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, झोलाछाप नियंत्रण सेल के नोडल डॉ. अमित कुमार ने बीते छह माह में रामगंगानगर कॉलोनी, तुलाशेरपुर, रोहिला टोला, बहेड़ी, भोजीपुरा, शीशगढ़, दुनका आदि इलाकों के अवैध क्लीनिक, अस्पताल सील किए। जांच में मौजूद स्टाफ अप्रशिक्षित मिला तो कहीं संचालक लापता मिले।
मामले में नोटिस देकर कार्यालय बुलाया गया, लेकिन किसी पर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई। यह हाल तब है जबकि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले झोलाछापों पर रिपोर्ट दर्ज कराने का शासनादेश है।
इधर, झोलाछाप के इलाज से डोहरा गौटिया निवासी शिशुपाल ने बेटे की हालत बिगड़ने पर जब हंगामा हुआ तो नोडल अफसर ने रिपोर्ट कराई। शिशुपाल ने अधिकारियों की मिलीभगत से सैकड़ों झोलाछापाें के सक्रिय होने का आरोप लगाया है। कहा कि अफसर नोटिस देकर सौदा करते हैं।