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नोटबंदी के फैसलेे ने उड़ा दी थी नींद

Wed, 08 Nov 2017 02:39 AM IST
बरेली
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आठ नवंबर, 2016.. मंगलवार.. समय रात 8 बजे.. नौकरी और व्यापार में दिन भर की व्यस्तता के बाद घर लौटे लोग टेलिविजन देखने में मशगूल थे। अचानक घोषणा हुई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे। ढाई साल के कार्यकाल में पहला मौका था, जब प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करने जा रहे थे, लिहाजा लोगों को उत्सुकता हुई। प्रधानमंत्री के टेलिविजन पर नोटबंदी की घोषणा करते ही देश भर के लोग सकते में आ गए। इधर, प्रधानमंत्री का संबोधन खत्म हुआ और उधर फोन घनघनाने शुरू हो गए। घर, संस्थान, प्रतिष्ठान और बाजार में उथल-पुथल मच गई। लोग एक हजार और पांच सौ के नोट खपाने में जुट गए। सर्राफा बाजार की रौनक अचानक बढ़ गई और देखते-देखते सोना 50 हजार रुपये प्रति दस ग्राम तक पहुंच गया।
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नोटबंदी ने घरेलू महिलाओं को बुरी तरह प्रभावित किया। आड़े समय के लिए सालों की जो बचत हजार और पांच सौ के नोटों की शक्ल में थी, वह अचानक रद्दी हो गई। दस नवंबर से पुराने नोट बदले जाने थे, लिहाजा मंगलवार रात से ही एटीएम के आगे लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। पैसों की किल्लत के चलते लोगों ने बहुत सारे जरूरी कामकाज तो टाल दिए, लेकिन जिन घरों में जल्द ही वैवाहिक कार्यक्रम होने वाले थे, वे तनाव में आ गए। 
तमाम परिवारों में आज भी एक हजार और पांच सौ के पुराने नोट मौजूद हैं। लोग, खासकर महिलाएं जो पांच सौ और हजार के नोटों की शक्ल में जो छोटी-मोटी रकम इधर-उधर रखकर भुलाए बैठी थीं, वह अब जब अनायास उनके हाथ लगती है तो नोटबंदी को कोसने के सिवा उन्हें कुछ नहीं सूझता। नोट बंदी का एक साल पूरा होने पर कारोबारी, व्यापारी, सीए, बैंक यूनियन नेता, चिकित्सकों आदि ने मिली-जुली प्रतिक्रिया जताई।
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नोट बंदी ने कारोबार तबाह कर दिया। नियोजित तरीके से यह कदम उठाया गया था, क्योंकि इससे एक माह पहले यूपी में कई शहरों में बीजेपी नेताओं ने संपत्तियां खरीद कर रजिस्ट्री कराई थीं। केंद्र सरकार ने मल्टी नेशनल कंपनियाें को फायदा पहुंचाने के लिए यह कदम उठाया था। उद्योग धंधे बंद हुए और बड़े पैमाने पर लोग बेरोजगार हुए। 
- प्रवीण सिंह ऐरन, पूर्व सांसद

हर बड़े फैसले में फायदा और नुकसान होते हैं। रियल इस्टेट और अन्य कारोबार धड़ाम हुआ है, जबकि कुछ क्षेत्रों में इसका अच्छा असर दिखा। बहरहाल संभलने में समय लगेगा। टैक्स और करदाता बढ़े हैं, लोगों ने सिस्टम अपनाना शुरू कर दिया है। लेनदेन भी डिजिटल होने लगा है। 
- राजा चावला, आयकर बार एसोसिएशन

कोई ज्यादा प्रभाव नहीं दिखा है। टैक्स और करदाताओं में ज्यादा वृद्धि हुई है। सिस्टम में काम करने के लिए जागरूकता आ रही है। आर्थिक सुधार में एक बड़ा साहसिक कदम है, परिणाम धरातल पर आने में समय लगेगा।
- मनोज मंगल, सीए

कामकाज प्रभावित हुआ है। सराफा मार्केट से गायब हुई रौनक लौटी नहीं है। युवा और नए ग्राहक डिजिटल लेनदेन कर रहे हैं। ऐसा पहले नहीं था। अभी सरकारी सिस्टम स्लो होने से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। अभी तो बाजार ठंडा ही है।
- संदीप अग्रवाल, सर्राफ

सबसे बड़ा कदम, इसे इतिहास का काला अध्याय कहें तो अनुचित नहीं होगा। नोटबंदी से कारोबारी दो दशक पीछे चला गया है। व्यापार पटरी पर लौटने में वर्षों लगेंगे। तमाम व्यापारी सड़कों पर आ गए हैं। उनके धंधे बंद हो गए हैं।
- राजेंद्र गुप्ता, उद्योग व्यापार मंडल

नोटबंदी से कोई फायदा-नुकसान नहीं हुआ है। लोगों में जागरूकता आई है और साफ सुथरा काम करने की ओर बढ़ने लगे हैं। कारोबार प्रभावित हुआ, सुधरने में समय लगेगा। सरकारी सिस्टम सहयोग करे तो व्यापार में तेजी आएगी।
- राजेश गुप्ता, उद्यमी

अब तो लोग भूल गए हैं। प्लास्टिक मनी का प्रचलन बढ़ा है। कोई भी बदलाव तुरंत परिणाम नहीं देता है। यह एक बड़ा ऐतिहासिक और साहसिक कदम था, इसका मिलाजुला असर हर क्षेत्र में पड़ा है। कारोबार भी धीरे-धीरे सुधर रहा है, सरकार बैंक लेनदेन में वसूले जाने वाला चार्ज कम करे।
- दिनेश गोयल, आईआईए, मंडलाध्यक्ष

भ्रष्टाचार और कालेधन पर कोई अंकुश नहीं लग पाया। कारोबार और उद्यमी प्रभावित हुए हैं। डिजिटल लेनदेन जरूर बढ़ा है। ओवरऑल इस फैसले से कोई फायदा अब तक नहीं हुआ है। पूरा एक वर्ष बीतने पर भी बाजार सदमे से उभर नहीं पाया है।
- विक्रम भार्गव, उद्यमी

हर किसी फैसले का मिलाजुला असर होता है। ऑटोमोबाइल बाजार में चमक आई है। लोगोें में सिस्टम में आने की समझ आने लगी है। नोट बंदी से कुछ समय परेशानी जरूर आई थी, लेकिन अब सब सामान्य हो चुका है।
- पंकज अग्रवाल, कारोबारी

एक बेहतर और साहसिक कदम था। इससे पहले सरकारों ने कोशिश तो की थी, लेकिन साहस नहीं जुटा पाईं थीं। हर किसी अच्छे काम का विरोध भी होता है और उसके बेहतर परिणाम सामने आने में समय भी लगता है। सर्राफा, कपड़ा और गारमेंट आदि बाजार टैक्स रहित थे। इससे अब राजस्व मिलना शुरू हो गया है।
- अरुण गुप्ता, ऑटोमोबाइल कारोबारी

हमने पहले दिन ही बेहतर कदम बताया था, अब परिणाम सामने आने लगे हैं। टैक्स चोरी से कारोबार नहीं चलेगा। साफ सुथरा काम करने वाले उद्यमी और कारोबारी इसे सराहा रहे हैं। सुविधाओं में विदेशों की तुलना करने वाले लोग इसके आलोचक हैं।
- घनश्याम खंडेलवाल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ कामर्स

बाक्स:

सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया था। उस समय मैं खुद वित्त मंत्रालय में था। इससे काला धन प्रभावित हुआ है। बैंकों में जमा पूंजी बड़ी है और टैक्स देने वालों में उल्लेखनीय उछाल आया है। करेंसी की कोई किल्लत नहीं है। टैक्स नहीं देने वाले और सरकार विरोधी कुछ तो बोलेंगे ही।
- संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री
 
दिन रात काम किया
बैंकों में आधी-आधी रात काम किया। खाना खाने का तक वक्त नहीं मिल पाता था। कुछ कारोबारी बैंकों में नाश्ता और खाना देने पहुंचा जाते थे, उनके इस व्यवहार से थकान कम हो जाती थी। वे पल हमें हमेशा याद रहेंगे। अभी कुछ बैंक प्रबंधन ने ओवरटाइम नहीं दिया है।
- दिनेश सक्सेना, सचिव बैंक इंपलाइज यूनियन

बैंक कर्मियों ने नोटबंदी में दिन रात काम किया। भीड़ को नियंत्रित कर उनका गुस्सा भी शांत किया जाता था। लोग निराश नहीं हो इसके लिए आधी रात बाद तक काम होता था। पूर्व अफसरों ने भी सहयोग किया। एक बार विदेशी नागरिक फंस गया तो एसबीआई मेन ब्रांच में उसे वैध करेंसी उपलब्ध कराई थी। ऐसे कई अनुभव हैं जो यादगार रहेंगे।
- आरके गौड़, एसबीआई, वरिष्ठ अधिकारी
   


फोटो-
नोटबंदी सरकार का सही कदम था, लेकिन इसके क्रिन्यान्वन का तरीका गलत था। जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ा। सरकार को अब बडे़ और व्यापक स्तर पर अर्थव्यवस्था को गति देने के  लिए कदम उठाने चाहिए। ताकि देश तेजी से विकास कर सके। देरी से और नुकसान हो सकता है।
- रमनदीप सिंह, ज्वाइंट सेक्रेटरी, क्रेडाई नेशनल

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नोटबंदी सरकार का सही फैसला था, लेकिन इसे लागू करने के दौरान कुछ समय के लिए लोगों को परेशानी उठानी पड़ी। इतने बड़े फैसले में कुछ दिक्कतें तो होती ही हैं। अब किसी को पैसे की दिक्कत नहीं है। नोटबंदी के बाद आगे देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। इससे जनता को लाभ मिलने की उम्मीद है।
- अनुमप सक्सेना, सीनियर आर्किटेक्ट

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नोटबंदी पर मेरा व्यक्तिगत विचार है कि देश को इससे कोई फायदा नहीं हुआ। प्रधानमंत्री जी ने कालाधन वापस आने, भ्रष्टाचार कम होने, आतंकवाद खत्म होने की बात कही थी। इसके बारे में जनता बेहतर बता सकती है। नोटों की गिनती अभी तक पूरी नहीं हुई है। जिस देश में नोटबंदी हुई वहां बड़े नोट बंद करके छोटे नोट शुरू किए गए लेकिन भारत में उल्टा हुआ। नोटबंदी का न तो वर्तमान पर कोई असर दिखा और न ही भविष्य में दिखेगा।
- डॉ. आईएस तोमर, निवर्तमान मेयर  

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मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का उद्देश्य तो पूरा नहीं हुआ, उलटे इससे महंगाई और बेरोजगारी बढ़ गई। इस मामले में सरकार पूरी तरह से फेल साबित हुई है। कारोबार ठप हो गए हैं। आगे भी कोई लाभ मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
- ब्रह्म स्वरूप सागर, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा 

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 गरीबों की तो कमाई हो गई
नोटबंदी से गरीबों की कमाई हो गई। नुकसान उनको उठाना पड़ा जिनके पास काला धन था। अमीरों ने मजदूरों या नौकरों केखातों में पैसा जमा कराया। बैंकों ने सिस्टम को सपोर्ट नहीं किया। वरना, बड़ी मात्रा में कालाधन वापस आ सकता था। फिर भी, इससे किसानों और गरीबों का भला हो गया।
 - अनिल साहनी, प्रगतिशील किसान

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 ब्लैक मनी निकलकर बाहर आया। जिनके पास बहुत ज्यादा ब्लैक मनी था, उसे लोगों ने जलाकर या नदी तालाबों में बहाकर नष्ट किया। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा। आतंकी नक्सलियों के फंड रुके। कश्मीर में पत्थरबाजी रुकी। रही सही कसर जीएसटी और बेनामी संपत्ति कानून पूरी करेगा।
- डॉ. विकास वर्मा, प्रगतिशील किसान

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नोटबंदी से व्यापारी वर्ग या आम आदमी को थोड़े दिन दिक्कत हुई लेकिन बाद में सब कुछ ठीक होता चला गया। देशहित में नोटबंदी फायदेमंद रही। अर्थव्यवस्था सुस्त रही लेकिन ब्लैक मनी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा। आने वाले दिनों में यह बहुत ज्यादा फायदेमंद साबित होगी।
- नरेंद्र गुप्ता, व्यवसायी 

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नोटबंदी से कारोबारों पर बहुत असर पड़ा है। बेरोजगारी बढ़ी है। रियल एस्टेट के क्षेत्र में कई प्रोजेक्ट बंद हो गए हैं। जहां सैकड़ों लोग काम करते थे, वहां अब चंद लोग काम कर रहे हैं। मकानों की डिमांड नहीं बढ़ी तो आगे भी कोई उम्मीद नहीं है।
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- मिंटू भाटिया, कांटेक्टर, निर्माण कंपनी  
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