बरेली। कचहरी में नए तरीके का मामला सामने आया है। बार एसोसिएशन के मुताबिक परिसर में कानून के गैरकानूनी अलंबरदार घूम रहे हैं। डिग्री व लाइसेंस के बिना ही काला कोट पहनकर कई लोग फर्जी तरीके से काम कर रहे हैं। बार एसोसिएशन के सचिव ने बताया कि जल्द ही कमेटी गठित कर ऐसे लोगों को पकड़कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बार एसोसिएशन के सचिव वीरेंद्र प्रसाद ध्यानी ने बृहस्पतिवार को एक पत्र जारी किया। इसमें लिखा है कि कचहरी में काला कोट पहनकर फर्जी तरीके से काम करने वालों के संबंध में सूचनाएं एसोसिएशन के पदाधिकारियों के माध्यम से प्राप्त हो रही हैं। इनके पास न तो लाइसेंस है, न ही डिग्री। अधिवक्ता न होने के बावजूद भी वे काला कोट पहनकर वादकारी को अपना परिचय अधिवक्ता के रूप में देते हैं। जबकि, उनका न तो पंजीकरण है, न ही वे सीओपी धारक (प्रैक्टिशनर्स) हैं।
सचिव का कहना है कि यदि वे मुंशी हैं तो पंजीकरण कराएं। अधिवक्ता की वेशभूषा में किसी भी न्यायालय में बहस या बयान आदि कार्य करते हुए कोई फर्जी व्यक्ति पाया गया तो उसके विरुद्ध बार एसोसिएशन सख्त रुख अपनाएगी। ऐसे अवांछनीय व्यक्तियों को पकड़ने के लिए जल्द ही बरेली बार एसोसिएशन की तरफ से निगरानी कमेटी गठित की जाएगी। औचक निरीक्षण कर ऐसे लोगों को पकड़ा जाएगा।
बार एसोसिएशन की तरफ से जारी किए गए पत्र के पीछे बुधवार का एक घटनाक्रम जुड़ा है। एक युवती काला कोट पहनकर अदालत में बयान देने पहुंची। उसका वीडियो वायरल हो गया था। इस मामले में थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। युवती काला कोट पहने थी। पता चलने पर युवा अधिवक्ताओं में आक्रोश फैल गया। मौके पर बार सचिव वीपी ध्यानी भी पहुंचे। युवती से पूछा तो पता चला कि उसका पंजीकरण ही नहीं है। तब युवती से काला कोट उतरवाया गया।