शरीयत के खिलाफ कोई भी फैसला स्वीकार नहीं
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तीन तलाक के मुद्दे पर दिल्ली में हुई अहले सुन्नत व जमाते बरेलवी के उलमा की बैठक में एलान किया गया कि शरीयत के खिलाफ कोई भी फैसला स्वीकार नहीं होगा। साथ ही यह भी तय किया गया कि वे इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में मुदकमा लड़ेंगे।
बरेली के आलिम मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बैठक के हवाले से प्रेस को यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा शरीयत के ताल्लुक से अच्छी नहीं है, इसलिए तीन तलाक पर सभी उलमा ने सामूहिक फैसला लिया है कि इस सिलसिले में हम किसी भी सूरत में झुकने को तैयार नहीं हैं। बैठक में बरेलवी उलमा की नुमाइंदगी के लिए रजा एकेडमी ने मौलाना शहाबुद्दीन रजवी को पक्षकार घोषित किया। इस दौरान मौलाना सईद नूरी (मुंबई), मौलाना गुलाम रसूल पटना (बिहार), मौलाना फजलउल्ला चिश्ती व मौलाना अब्दुल कादिर हबीबी (दिल्ली), प्रोफेसर हलीम खां (एमपी), सय्यद जमील रजवी (जालना) आदि प्रांतों के आलिम शामिल हुए।
इससे पूर्व सुप्रीम कोर्ट में अहले सुन्नत व बरेलवी जमात के लोग भी पहुंचे। वहां पक्षकार के तौर पर रजा एकेडमी (मुंबई) व जमात रजा मुस्तफा (बरेली) और दूसरे इदारे शरीया आदि मौजूद रहे। इसमें मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल, जमात रजा मुस्तफा के वकील जियाउल मुस्तफा और रजा एकेडमी के वकील जियाउल मुजतबा और इदारे शरीया के वकील सरवर रजा ने बहस की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में मौलाना सईद नूरी, मौलाना गुलाम रसूल बलयाबी, इंजीनियर रदुल्ला चिश्ती और मौलाना शहाबुद्दीन आदि मौजूद रहे।