लक्ष्य हासिल करने की ललक हो तो संसाधनों का अभाव आड़े नहीं आता। बिजली किल्लत, अच्छी कोचिंग नहीं मिलने, जर्जर सड़कों से स्कूल तक पहुंचने की जद्दोजहद समेत अन्य असुविधाओं को दरकिनार कर गांव की मिट्टी में एक बार फिर मेधा उपजी है। ग्रामीण परिवेश से आने वाले इन मेधावियों ने शहर को फिर मात दी है।
पिछले वर्ष की तरह इस बार भी ग्रामीण क्षेत्र के काॅलेजों के विद्यार्थियों ने शहर के विद्यार्थियों को पीछे छोड़ दिया है। हाईस्कूल के मेधावियों की सूची में 11 विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। इसमें देहात के नौ और शहर के दो विद्यार्थी शामिल हैं। इंटर के मेधावियों की सूची में शामिल 18 विद्यार्थियों में 16 देहात और दो शहर के हैं। सत्र 2024-25 में हाईस्कूल के शीर्ष 10 मेधावियों की सूची में शहर का कोई विद्यार्थी नहीं था। इंटर के टॉपर्स की सूची में शहर के दो विद्यार्थियों ने जगह बनाई थी।
सत्र 2023-24 के परिणाम पर गौर करें तो इंटर की टॉपर्स लिस्ट में स्थान बनाने वाले 21 में से 16 ग्रामीण परिवेश के थे। हाईस्कूल के 23 में से 18 टॉपर्स ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के थे। आंकड़े बताते हैं कि शहर में सुविधाएं भले हों, लेकिन अभाव में भी देहात का परचम लहरा रहा है।
छात्रों की क्षमता के साथ ही शिक्षकों-अभिभावकों की भी जिम्मेदारी
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अजीत कुमार के मुताबिक, टॉपर्स की सूची में देहात आगे रहा या शहर, यह मायने नहीं रखता। सफलता का ज्यादातर हिस्सा विद्यार्थी की क्षमता और शिक्षक की भूमिका पर निर्भर होता है। कुछ हद तक अभिभावक और पारिवारिक परिवेश भी मायने रखता है। देहात और शहर के सभी परीक्षा केंद्रों पर पुलिस और प्रशासन मुस्तैद रहा। सीसी कैमरों से निगरानी हुई। उड़न दस्ते सक्रिय रहे। कहीं कोई गड़बड़ी या नकल नहीं होने दी गई। अगर किसी को प्रतीत हो रहा है कि देहात में नकल हुई है तो यह गलत है।