बुझिया शुमाली गांव में 11 को होगी नीलामी, प्रशासन ने सीमांकन कर लगाई थी लाल झंडी
बरेली। पत्नी-बच्चों को भरण-पोषण की बकाया धनराशि 2.60 लाख नहीं देने पर तहसील प्रशासन हरीश कुमार की 9.60 बीघे जमीन की नीलामी करेगा। नीलामी के संंबंध में आदेश भी जारी हो गया है। हरीश की कृषि योग्य जमीन गांव बुझिया शुमाली में है, जिस पर गेहूं-आलू की फसल खड़ी है। पिछले दिनों 14 जनवरी को सदर तहसील ने सीमांकन के बाद उनकी गेहूं और आलू की फसल पर लाल झंडी लगा दी दी थी। यह कार्रवाई परिवार न्यायालय के आदेश पर हो रही है।
खेती की नीलामी का समय 11 फरवरी को दोपहर दो बजे रखा गया है। इस संबंध में एसडीएम सदर प्रमोद कुमार ने आदेश भी जारी कर दिया है। इस आदेश के मुताबिक, बुझिया शुमाली गांव में गाटा-346 पर हरीश के हिस्से की 0.605 हेक्टेयर अर्थात 9.60 बीघे जमीन की नीलामी की जाएगी। इससे पूर्व अमीन रवि कुमार की रिपोर्ट पर तहसील प्रशासन ने कुर्की शुदा अचल संपत्ति इसी कृषि योग्य जमीन को नीलाम करने के लिए 19 जनवरी को आरसी प्रपत्र-43 (अचल संपत्ति की बिक्री के लिए उद्घोषणा का अधिपत्र) जारी किया था।
बताया जा रहा है कि हरीश कुमार के विरुद्ध अपर प्रधान न्यायाधीश ज्ञानेंद्र त्रिपाठी परिवार न्यायालय-तृतीय ने संपत्ति कुर्क करने के आदेश 24 सितंबर 2025 को डीएम को दिए थे। विपक्षी हरीश ने वर्ष 2019 में बकाया भरण-पोषण की धनराशि 25 हजार रुपये जमा नहीं किए हैं। इसी तरह वर्ष 2022 में बकाया 1.80 लाख रुपये भी नहीं अदा किया है। वर्ष 2023 में भी उसने बकाया 80 हजार रुपये भरण-पोषण की धनराशि अदा नहीं की है। इस तरह विपक्षी हरीश पर भरण-पोषण के कुल 2.60 लाख रुपये बकाया हैं। संवाद
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भरण-पोषण देने से बचने को मां के नाम दान कर दी जमीन
न्यायालय के आदेश के मुताबिक, पीड़िता ने न्यायालय को बताया था कि विपक्षी हरीश कुमार ने अपनी संपूर्ण अचल संपत्ति जानबूझकर 19 जनवरी 2024 को अपनी मां मुन्नी देवी के नाम दानपत्र के तहत बैनामा कर दिया है। इससे न्यायालय के आदेश से उसकी जमीन की कुर्की न हो सके। ऐसे में न्यायालय संबंधित दानपत्र निष्प्रभावी घोषित किया है। डीएम को निर्देश दिए हैं कि कार्रवाई से बचने मात्र के उद्देश्य से किया गया दानपत्र को निष्प्रभावी मानते हुए अपने स्तर से संबंधित कृषि भूमि में से देय भरण-पोषण भत्ता की धनराशि की सीमा तक विपक्षी के अंश को कुर्क व नीलामी कराएं।