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बेटी पूजा में बिछाने को लाई अखबार, छपी मिली सात माह से लापता पिता की तस्वीर

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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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महाबलीपुरम में भटक रहा नवंबर में ऊधम सिंह नगर से लापता हुआ पीलीभीत का रामदास
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सितारगंज में दर्ज है मानसिक रूप से कमजोर ढाबा संचालक की गुमशुदगी, परिजनों ने पुलिस से लगाई गुहार

बरेली। पीलीभीत में बरखेड़ा थाने से बमुश्किल तीन किमी की दूरी पर स्थित पतरसिया गांव में रामदास के परिवार वालों की निगाहें सात महीने से दहलीज पर टिकी हैं। हर आहट पर घर के लोग रामदास के लौट आने की उम्मीद में दरवाजे की तरफ दौड़ते हैं। पुलिस और परिजनों का कहना है कि बरखेड़ा में बजाज हिंदुस्तान फैक्टरी के सामने ढाबा चलाने वाले रामदास एक सड़क दुर्घटना में अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। इसके बाद घर - गृहस्थी चलाने का जिम्मा उनकी पत्नी ऊषा के कंधों पर आ गया। ऊषा ने सितारगंज में गत्ता फैक्टरी में काम शुरू कर दिया। जाते वक्त पति को भी साथ ले जाती ताकि काम के साथ - साथ बीमार पति का भी ध्यान रख सके। लेकिन 27 नवंबर 2019 को उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में सितारगंज गत्ता फैक्टरी के गेट से रामदास अचानक लापता हो गए। घर वालों ने लाख कोशिशें कीं, पुलिस में गुमशुदगी भी दर्ज कराई लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। चार दिन पहले रामदास की बड़ी बेटी पूजा में बिछाने के लिए पड़ोस से अखबार मांग कर लाई। उसने अखबार पलटा तो उसके हाथ में लगे ‘अमर उजाला’ के बरेली देहात संस्करण के पेज 10 पर उसके पिता की तस्वीर छपी थी। लापता रामदास की यह फोटो 27 मार्च 2020 को महाबलीपुरम में उस समय ली गई थी जब दो पुलिस वाले उन्हें मास्क पहना रहे थे।
रामदास के भाई विपिन बरखेड़ा में ही फोटो स्टेट की दुकान करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके भाई रामदास उर्फ प्यारेलाल (45) बरखेड़ा में ही फैक्टरी गेट पर ढाबा चलाते थे। काम धंधा अच्छा चल रहा था और चैन से गुजर बसर हो रही थी। फिर दो साल पहले एक दिन अचानक उनका एक्सीडेंट हुआ और उन्होंने लोगों को पहचानना बंद कर दिया। धीरे - धीरे मानसिक संतुलन भी गड़बड़ाने लगा। ढाबा बंद हो गया और परिवार के सामने गुजर बसर का संकट खड़ा हो गया। ऐसे में रामदास की पत्नी ऊषा के कंधों पर गृहस्थी चलाने का बोझ आ गया। दो बेटियों, एक बेटे और पति को लेकर वह करीब डेढ़ साल पहले उत्तराखंड के सितारगंज चली गईं। वहां गत्ता फैक्टरी में ऊषा का भाई नौकरी करता है उसने वहीं बहन को भी काम दिला दिया। ऊषा फैक्टरी जाते समय पति को भी साथ ले जाती थी ताकि उसे समय पर दवाएं दे सके और बीमार पति पर नजर भी रख सके। जितनी देर ऊषा फैक्टरी में काम करती, उतनी देर रामदास फैक्टरी गेट पर गार्ड्स के पास बैठा रहता था। लेकिन 27 नवंबर 2019 को दोपहर करीब डेढ़ बजे रामदास अचानक गायब हो गया। ऊषा फैक्टरी गेट पर पहुंची तो पति नहीं मिला। पता चला कि वह टहलता हुआ फैक्टरी से निकला और फिर लौटकर नहीं आया।
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तमाम कोशिशों के बाद भी सुराग नहीं लगा तो ऊषा ने सितारगंज थाने में पति की गुमशुदगी दर्ज करा दी। लेकिन रामदास का पता नहीं चला। रामदास के भाई विपिन का कहना है कि बेटी चार दिन पहले पड़ोस से पुराने अखबार मांग कर लाई थी। पूजा में बिछाने को अखबार पलटा तो अचानक उसमें अपने पिता की तस्वीर दिखी। बाकी परिजनों ने भी फोटो देखते ही रामदास को पहचान लिया। यह तस्वीर 27 मार्च को लॉकडाउन के दौरान महाबलीपुरम में ली गई थी। वहां पुलिस सड़कों पर रहने वाले निराश्रित और बेघर लोगों को मास्क पहना रही थी। विपिन का कहना है कि उनके भाई के शरीर के दाहिनी हिस्से पर फालिश पड़ी थी। फोटो में भी वही पेंट शर्ट है जो उन्होंने लापता होते समय पहनी थी। सितारगंज थाने के विवेचक चंदन सिंह विष्ट का कहना है कि रामदास के परिजनों ने अमर उजाला में छपी तस्वीर से उसकी पहचान की है। इसलिए वह महाबलीपुरम पुलिस से संपर्क किया जा रहा है। वहां जाकर उसकी तलाश भी करेंगे।

बरखेड़ा पुलिस ने कहा, पास बना देेंगे, खुद खोज लो

बरेली।लापता रामदास के भाई विपिन का कहना है कि अखबार में भाई की तस्वीर देखने के बाद वह बरखेड़ा थाने गए थे। पुलिस को फोटो दिखाकर भाई के बारे में बताया भी था। लेकिन पुलिस ने कहा कि इस समय कुछ नहीं हो सकता। विपिन को सलाह दी कि थाने से पास बनाकर दे देंगे तुम महाबलीपुरम जाकर अपने भाई को खोज लो।
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