बरेली। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर शहर में बनाए गए फुटपाथ आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। न्यूयॉर्क की तर्ज पर विकसित किए गए ये अत्याधुनिक फुटपाथ अब पैदल चलने लायक नहीं बचे हैं। नगर निगम की उदासीनता और अतिक्रमण से शहरवासियों का इन पर टहलने का सपना अधूरा रह गया है।
ये फुटपाथ कहीं उखड़े पड़े हैं तो कहीं धंस चुके हैं। इन पर पैदल चलना तो दूर, ठीक से खड़े होना भी मुश्किल हो गया है। जगह-जगह हुए अवैध कब्जों ने स्थिति और खराब कर दी है। अवैध दुकानें संचालित हैं या बड़े होर्डिंग के फ्रेम रखकर कब्जा जमा लिया गया है। सफाई कर्मचारी केवल खानापूर्ति करते हैं। नगर निगम इन फुटपाथों के रखरखाव और मरम्मत में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। पैदल यात्री जान जोखिम में डालकर मुख्य सड़क पर चलने को मजबूर हैं। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर फुटपाथों की हालत चिंताजनक है।
पॉश इलाकों में भी उपेक्षा
शहर के पॉश इलाके बरेली क्लब रोड पर करोड़ों रुपये की लागत से चौड़े फुटपाथ बनाए गए थे। देखरेख के अभाव में इनकी हालत बेहद खराब हो चुकी है। यह फुटपाथ कई जगहों से उखड़ गए हैं और कई हिस्सों में धंस चुके हैं। इसी मार्ग पर मंडलायुक्त आवास से लेकर कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सरकारी आवास भी हैं। इसके बावजूद इस समस्या पर किसी का ध्यान नहीं है।
व्यस्त मार्गों पर अतिक्रमण का कब्जा
शहर के व्यस्त चौकी चौराहे से गांधी उद्यान जाने वाले मार्ग पर फुटपाथों का नामोनिशान अतिक्रमण ने मिटा दिया है। कचहरी रोड से रेलवे स्टेशन जाने वाले मार्ग पर भी यही हाल है। यहां फुटपाथ के दोनों ओर बेतरतीब वाहन खड़े करके बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है। पटेल चौक पर यातायात और सुंदरता के लिए बनाए गए डिवाइडरों की लाखों रुपये की टाइल्स भी तेजी से उखड़ रही हैं। फुटपाथों पर ठेले और फड़ लगाकर अवैध कब्जे किए गए हैं, राहगीरों के लिए जगह नहीं बची है।
-
बयान
- खराब फुटपाथों को ठीक कराया जाएगा, जहां पर कब्जे की शिकायत है वहां अतिक्रमण टीम को भेजकर कार्रवाई कराई जाएगी। संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त