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तो 15 देशों में बढ़ जाएगी विवि की डिग्री की वैल्यू 

Thu, 22 Mar 2018 07:21 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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MJP Rohilkhand university
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 एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग करने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर है। दुनिया के 15 देशों में यहां की डिग्री की वैल्यू बढ़ जाएगी। यह मुमकिन होगा नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडीटेशन (एनबीए) से ग्रेड मिलने से जिसकी पहल शुरू कर दी गई है। एनबीए को लेकर विश्वविद्यालय में चली दो दिन की वर्कशाप में विशेषज्ञों ने इसके फायदे भी गिनाए। वाशिंगटन अकॉर्ड से दुनिया के 15 मुल्क जुड़े हैं जिसमें भारत भी है। इसका फायदा उन्हीं संस्थानों को मिलता है जिनको एनबीए से ग्रेड मिला होता है। एनबीए ग्रेड मिलने के बाद इसे इंजीनियरिंग की मार्कशीट पर भी प्रदर्शित किया जाएगा ताकि यहां का छात्र विदेश में नौकरी के लिए जाए तो उसे वरीयता मिल सके।

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एनबीए के लिए पढ़ाई का पूरा स्वरूप ही बदल जाता है। किताबी ज्ञान से ज्यादा व्यावहारिक ज्ञान पर जोर दिया जाता है। ब्लूम टेक्सोनॉमी जिसके तहत इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए बारह एट्रीब्यूट शामिल हैं, उसे लागू किया जाएगा। इसके तहत लाइफ लांग लर्निंग, कम्यूनिकेशन, एथिक्स, दि इंजीनियर एंड सोसाइटी, इंवायरमेंट एंड सस्टेन एबीलिटी, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एंड फाइनेंस जैसे कई बिंदुओं पर फोकस करते हुए पढ़ाया जाता है। वर्कशाप ले रहे प्रोफेसर मल्लिकार्जुन और प्रोफेसर प्रसाद ने इसके फायदे भी गिनाए। बताया कि वाशिंगटन अकॉर्ड से भारत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ताइवान, आयरलैंड, हांगकांग, जापान, कोरिया, मलेशिया, न्यूजीलैंड, रूस, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका, तुर्की, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम जैसे देश शामिल हैं। जिस तरीके से इन देशों में इंजीनियरिंग की पढ़ाई होती है उसी तर्ज पर एनबीए वाले संस्थानों में पढ़ाई होती है। मेकेनिकल इंजीनियरिंग के डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि इसके तहत आउट कम बेस्ड एजूकेशन पर फोकस होता है। छात्र ने जो पढ़ा उसका उसके जीवन पर क्या असर पड़ा। छात्र को इस काबिल बनाना कि अगर मेकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और उसको दूसरे फील्ड के काम में लगाया तो वह उसे बेहतर तरीके से कर सके। उन्होंने बताया कि एनबीए के लिए जो चीजें जरूरी हैं उनको पूरा किया जा रहा है। एनबीए से ग्रेड मिलती है तो इंजीनियरिंग विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। 

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