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Bareilly: राष्ट्रवादी विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ बोले- अजन्मा है सनातन धर्म... जो जन्मा है उसी का अंत होगा

Mon, 20 Mar 2023 08:39 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाल ब्यूरो, बरेली

सार

पुष्पेंद्र ने कहा कि हिंदुओं के पास संभलने के लिए अब वक्त कम है। आने वाली पीढ़ियों को बचाना है तो नई पीढ़ी को सच बताना ही होगा।
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कार्यक्रम में बोलते पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दुनिया में सिर्फ एक ही धर्म है... सनातन। इसके उदय के कोई प्रमाण नहीं। मगर इस्लाम, क्रिश्चियन आदि तथाकथित धर्मों के जन्म के प्रमाण हैं। जो जन्मे हैं उन्हीं का अंत भी होगा। मगर सनातन धर्म अजन्मा है। जो जन्मा ही नहीं वह अमर है। यह कहना है प्रसिद्ध राष्ट्रवादी विचारक पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ का। वह रविवार को बरेली के आईएमए हॉल में राष्ट्र पुनर्निर्माण मंच के सनातन सिद्धांतों पर राष्ट्र पुनर्निर्माण के आयाम विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में एकेटीयू लखनऊ के पूर्व कुलपति प्रोफेसर डॉ. आरके खण्डाल, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने भी अपने विचार रखे।

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पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने कहा कि सनातन का अर्थ साइंस है। इसमें धर्म का तात्पर्य माता-पिता, गुरु आदि धर्म से है। जातियां कर्म प्रधान थीं। करीब एक हजार सालों में इसे तोड़-मरोड़ा गया। हजारों साल पहले ऋषि-मुनियों ने जो बातें धर्मग्रंथ, वेद, पुराण, उपनिषदों में कहीं थीं, अब नासा उसे सही ठहरा रहा है। पृथ्वी से चांद तक की दूरी, धार्मिक प्रतीकों की वैज्ञानिक अवधारणा है। जिस कालखंड में यह जानकारियां दी गईं उस दौरान अगर लोगों को सीधे-सीधे समझाते तो शायद वह माना नहीं जाता। इसलिए उन्होंने इसे प्रतीकों से जोड़ा। पूजा-पाठ से जोड़ा। 

प्रणाम, चरण स्पर्श, तुलसी, पीली की पूजा, नदियों को मां कहने के पीछे यही वजह रही। मगर तथाकथित धर्मों के लोग इसे हिंदू धर्म को पूजावादी बताते हैं। कहा जाता है कि ‘इस्लाम इज द रिलीजन ऑफ पीस’, इसमें पीस का अर्थ क्या है, यह अब तक तमाम लोग नहीं समझ सके। इसलिए सारे धर्म बराबर होने की बात गलत है। जो सभी धर्म समान बताते हैं वे लालची लोग हैं। जिनके लिए निज हित राष्ट्र से ऊपर है। राष्ट्र और देश के कथन में काफी अंतर है। राष्ट्र विस्तृत संकल्पना और देश भूमि का टुकड़ा है।

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स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा गलत पाठ

पुष्पेंद्र ने कहा कि मुंबई, बंगाल और दिल्ली के कुछ शिक्षण संस्थानों में जो पुस्तक पढ़ाई जा रही है। उनमें दिए गए संदर्भ गलत हैं। मगर सालों से इनका कोई विरोध नहीं हो रहा। हिंदू सो रहा है, उसे जागना होगा। मुंबई में ऐसे ही एक पुस्तक के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने पुरजोर विरोध किया। फिर वहां की सरकार को वह पाठ हटाना पड़ा। पर बंगाल में अभी वहीं पाठ पढ़ा रहे हैं। जिसका पुरजोर विरोध होना चाहिए। सनातन धर्म का विकास तभी होगा जब सामूहिक मांग उठेगी। अगर 95 करोड़ की जनसंख्या एक साथ मांग करेगी तभी सरकारें झुकेंगी।

ताजमहल नहीं रामसेतु घूमने जाएं हिंदू नवविवाहित युगल

पुष्पेंद्र ने कहा कि हिंदू नवविवाहित जोड़े अब ताजमहल घूमने जाते हैं। जहां क्लिंटन ने फोटो खिंचाई थी, वहीं फोटो खिंचवाते हैं। ताजमहल किसने बनवाया और क्या किया यह सभी को पता है। ऐसी जगह जाना ही नहीं चाहिए। अगर घूमने ही जाना है तो रामसेतु जाना चाहिए। प्रभु राम और सीता के प्रेम का प्रतीक है। हिंदू जड़ से परे हटकर पत्तों को पानी दे रहे हैं। जड़ को अगर पानी दें तभी हिंदू धर्म सुरक्षित हो सकेगा। वर्तमान में युवा डिग्री, पद, प्रतिष्ठा, कपड़े जिनके अच्छे हों, उन्हें ज्ञानवान समझते हैं। जबकि शिक्षा और ज्ञान का कोई तालमेल नहीं है।
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नई पीढ़ी को बचाना है तो सच बताना होगा

पुष्पेंद्र ने कहा कि हिंदुओं के पास संभलने के लिए अब वक्त कम है। आने वाली पीढ़ियों को बचाना है तो नई पीढ़ी को सच बताना ही होगा। उन्हें संविधान की अवधारणा, देश की आजादी के पीछे का षड्यंत्र, महात्मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू की कूटनीति, हिंदुओं को धर्म से भटकाने की साजिश आदि का सच बताना होगा। देश किसके हाथों में सुरक्षित है, इसे पहचानने की क्षमता पीढि़यों को देनी होगी ताकि देश की बागडोर सही हाथों में रहे। स्वामी विवेकानंद, महात्मा बुद्ध, सम्राट चंद्रगुप्त आदि के बारे में अभी नहीं बताएंगे तो पछताएंगे।
 
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