बरेली। रबड़ी टोला की नसरीन के सामने अब नई चुनौती आकर खड़ी हो गई है। उनको साबित करना है कि वाकई में नाजिम उनके पिता हैं। इसी तरह मौज्जम अली समेत कई हजार लोगों को साबित करना है कि जिस व्यक्ति को पिता बताया है, क्या वह वाकई उनके पिता हैं भी।
चूंकि, उसी व्यक्ति को अन्य छह लोगों ने भी अपना पिता होने का दावा पहले से कर रखा है। ऐसे ही सैलानी के जियाउद्दीन की आयु दादा-दादी के बीच में 40 से कम और हिना व उनके माता-पिता के बीच आयु का अंतर 50 वर्ष से अधिक बता दिया गया है। इस तरह के त्रुटिपूर्ण विवरण वाले 3.58 लाख लोग हैं। एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) अभियान में पहले लोगों ने गणना प्रपत्र भरने और दस्तावेज एकत्र करने में बूथ से लेकर तहसील तक दौड़-भाग की। छह जनवरी को ड्राफ्ट का अनंतिम प्रकाशन हुआ तो उसमें एक-दो हजार नहीं बल्कि 3.58 लाख लोगों के नाम व अन्य विवरण में त्रुटियां निकल आई हैं।
अब इनको नोटिस जारी किया गया हैं। इनका वितरण सोमवार से बीएलओ शुरू कर रहे हैं।
साथ ही निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) एसआईआर के दौरान नो-मैपिंग के मिले 2.20 लाख वोटरों के सत्यापन में जुटे हैं। ऐसे में वोटरों के बीच मतदाता सूची में बने रहना या शामिल होना चुनौती से कम नहीं है।
चूंकि, निवास की प्रमाणिकता में आधार या सामान्य निवास प्रमाण भी मान्य नहीं है।
खासकर उन बुजुर्गों या अनपढ़ व्यक्तियों को दस्तावेज एकत्र कर बीएलओ को देना कठिन हो रहा है, जिनके हाथ की अंगुलियां काम नहीं कर रही हैं और जन्मतिथि प्रमाणित करने वाले कागजों का अभाव है।
मौलाना आजाद इंटर कॉलेज के बूथ पर शनिवार को पहुंचे सूफी टोला के 90 वर्षीय बुजुर्ग इशहाक अली ने बताया कि उनके पास आधार कार्ड है, जिसमें लिखी जन्मतिथि बीएलओ मान नहीं रहे हैं। अब वह ऐसा कागज कहां से लाएं, जो बीएलओ को दें व उनका नाम मतदाता सूची में बना रहे।