मिट्टी डालने के बाद नदी में कूड़ा फेंकने पर भी खामोश हैं अफसर
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रविवार को भी सिर्फ मुआयना करके लौट गया बाढ़ खंड का स्टाफ
बरेली। डोहरा रोड पर नकटिया नदी में मिट्टी के बाद बड़ी मात्रा में कूड़ा फेंक जाने के बावजूद बाढ़ खंड का स्टाफ बार-बार निरीक्षण तो कर रहा है लेकिन इस खेल में शामिल लोगों के खिलाफ अब तक कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया गया है। जिक्र और फिक्र करते हुए सप्ताहभर से ज्यादा का समय ऐसे ही व्यतीत कर दिया गया है। रविवार को भी बाढ़ खंड की टीम ने मौके पर पहुंचकर जायजा लिया।
प्रशासन और बाढ़ खंड के अधिकारियों की ढिलाई से नकटिया नदी की जमीन पर अवैध कब्जे होते जा रहे हैं। अभी नवंबर में बाढ़ खंड ने नकटिया नदी की सफाई कराई थी। उस समय कई स्थानीय किसानों ने एसडीएम और बाढ़ खंड के अधिकारियों से शिकायत की थी कि उनके खेतों की मिट्टी काटकर नदी का रुख मोड़ दिया गया है। इस पर राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच कर रिपोर्ट दे दी कि नदी का प्रवाह अपनी जगह पर ही है। इस मामले में तहसील प्रशासन से क्लीन चिट मिलने के बाद पहले नकटिया पुल के पास ही बाउंड्रीवाल बना रहे एक निर्माणकर्ता ने नदी के अंदर सैकड़ों टन मिट्टी डाल दी। नदी की जमीन पर मिट्टी का पटान कर कब्जे का मामला सामने आया तो बाढ़ खंड की टीम 15 फरवरी को मौके पर गई और निर्माणकर्ता को नदी से तत्काल मिट्टी हटाने के निर्देश देकर लौट गई। अब दो-तीन पहले यहां मिट्टी के ढेर के पास ही बड़ी मात्रा में नदी के अंदर कूड़ा डाल दिया गया है। इसके बाद रविवार को बाढ़ खंड की टीम फिर मौके पर पहुंची और निरीक्षण की औपचारिकता निभा कर लौट आई है।
बाढ़ खंड और नगर निगम एक-दूसरे को ठहरा रहे जिम्मेदार
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के आदेश का उल्लंघन कर नकटिया नदी में हर दिन बड़ी मात्रा में कूड़ा डाला जा रहा है। इसके लिए बाढ़ खंड और नगर निगम एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। बाढ़ खंड के एक्सईएन राजीव कुमार का कहना है कि इसके लिए नगर निगम को नोटिस दिया जाएगा। जबकि नगर निगम के पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान ने बताया कि नकटिया नदी शहर की सीमा से बाहर है। नगर निगम यहां कूड़ा नहीं फेंक रहा है।