फिजूलखर्ची और नशा
1. आजकल कई नौजवान नशे के आदी हो चुके हैं, जिसकी वजह से वह परिवार में विवाद और मां-बाप के लिए एक मुसीबत का सबब बन जाते हैं।
2. मस्जिद के इमामों और बुद्धिजीवियों को इस पर काम करना होगा।
3. मुसलमान शादी विवाह और दीगर कार्यक्रमों के साथ ही साथ जलसा, जुलूस, लंगर और उर्स में बेपनाह फिजूलखर्ची करते हैं। इस फिजूलखर्ची से कोई शबाब नहीं हासिल होता, बचना जरूरी है।
4. मुसलमान पीरी मुरीदी को असल इस्लाम न समझे, बल्कि असल इस्लाम तोहिद, नमाज, रोज़ा, हज, जकात हैं। इनके करने से खुदा और रसूल खुश होंगे।