बरेली। आला हजरत के छोटे साहिबजादे मुफ्ती आजम हिंद हजरत अल्लामा मुस्तफा रजा खां कादरी नूरी का 46वां एक दिसीय उर्स-ए-नूरी अदब-ओ-एहतिराम के साथ आला हजरत दरगाह परिसर में मनाया गया। इसमें तमाम उलमा और मुरीदीन की शिरकत रही।
उर्स कार्यक्रम की शुरुआत कुरानख्वानी से हुई। दिन में नात-ओ-मनकबत का दौर चला। सभी कार्यक्रम दरगाह प्रमुख हजरत मौलाना सुब्हान रजा खान की सरपरस्ती और सैयद आसिफ मियां की देखरेख में सम्पन्न हुए। तमाम जायरीन ने मजार शरीफ पर गुलपोशी, फातिहाख्वानी और दुआ की। शाम को हाजी गुलाम सुब्हानी ने मिलाद का नजराना पेश किया।
रात के मुख्य कार्यक्रम में सदारत करते हुए सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी ने मुफ्ती आजम हिंद की जिंदगी पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि मुफ्ती आजम हिंद ने मुल्क भर की सुन्नी खानकाहों को एक माला में पिरोने का काम किया। उन्होंने 1947 को मुल्क में हिंदू-मुस्लिम के नाम पर हुए बंटवारे की मुखालफत की।
मदरसा मंजर ए इस्लाम के सदर मुफ्ती अकिल रजवी की मौजूदगी में मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने पहले कर्बला के शहीदों को खिराज पेश किया। इसी तरह मुफ्ती अय्यूब नूरी, कारी अब्दुर्रहमान कादरी, मुफ्ती सैयद कफील हाशमी आदि की भी तकरीर हुई।
इस दौरान महशर बरेलवी, आसिम नूरी ने नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया। देर रात एक बजकर 40 मिनट पर कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। इसके बाद खुसूसी दुआ की गई। संचालन कारी यूसुफ रजा संभली ने किया। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि इस दौरान अहसान रजा खान, मोअज्जम रजा खान, सैयद मुस्तफा मियां, राशिद अली खान आदि मौजूद रहे।