बरेली। झूलेलाल द्वार के पास 50 लाख रुपये की लागत से बने मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर के संचालन का मार्ग अब साफ हो गया है। शुरुआत में स्थानीय निवासियों ने कचरे और बदबू को लेकर विरोध जताया था। नगर निगम ने निवासियों की चिंताओं को दूर करने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं।
राजेंद्र नगर, आवास विकास और डीडीपुरम जैसे इलाकों के लोगों को गंदगी और बदबू फैलने की आशंका थी। स्थानीय पार्षद शशि सक्सेना ने नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य से सेंटर को स्थानांतरित करने की मांग की थी। नगर निगम ने स्पष्ट किया कि घनी आबादी वाले क्षेत्र में कोई वैकल्पिक भूमि उपलब्ध नहीं है। विवाद के समाधान के लिए नगर आयुक्त ने कड़े निर्देश दिए। सेंटर के चारों ओर आधुनिक कर्टन वॉल बनाई गई है। इससे कचरा बाहर नहीं दिखेगा और बदबू भी नियंत्रित होगी।
परिसर की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। इन कदमों के बाद सेंटर के संचालन में अब कोई बाधा नहीं है। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने बताया कि जल्द ही इस केंद्र में राजेंद्र नगर, डेलापीर, डीडीपुरम और इज्जतनगर सहित शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों से कचरा लाया जाएगा। यहां कचरे का वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से निस्तारण होगा। इस व्यवस्था से शहर की साफ-सफाई को मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह पहल शहर को स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संवाद