बरेली। शहर में इलेक्ट्रॉनिक कचरे (ई-कचरे) के निस्तारण की तैयारी है। इससे पहले नगर निगम नोएडा की सर्वे एजेंसी के जरिये शहर से निकलने वाले ई-कचरे का आकलन करा रहा है। यह एजेंसी छह माह तक शहर के विभिन्न हिस्सों से आंकड़े जुटाएगी। इसके बाद ई-कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव राठी ने बताया कि एजेंसी ने बटलर प्लाजा से सर्वे शुरू कर दिया है। टीमें शहर के अन्य प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक बाजारों, दुकानों, मरम्मत केंद्रों और औद्योगिक क्षेत्रों में जाकर आंकड़े जुटा रही हैं। पुराने कंप्यूटर, खराब लैपटॉप, इस्तेमाल से बाहर हो चुके मोबाइल फोन, टेलीविजन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले कचरे का आकलन कर यह परखा जाएगा कि इसमें ब्रांडेड और अनब्रांडेड कंपनियों के उत्पादों का कितना हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ई-कचरे में कई खतरनाक रसायन और धातुएं पाई जाती हैं। इन्हें सामान्य कचरे के साथ फेंकने से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए इनकी वैज्ञानिक तरीके से रीसाइक्लिंग जरूरी है। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर नगर निगम शहर में ई-वेस्ट संग्रहण केंद्र स्थापित करने और इसके सुरक्षित निस्तारण के लिए दीर्घकालिक नीति बनाएगा।
इन बिंदुओं पर रहेगा जोर
- प्रतिवर्ष कितना ई-वेस्ट उत्पन्न हो रहा है।
- ब्रांडेड और लोकल इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से निकलने वाले कचरे का अनुपात क्या है।
- वर्तमान समय में पुराने मोबाइल फोन और कंप्यूटर आदि का निस्तारण कैसे किया जा रहा है।
- ई-कचरे के वैज्ञानिक और सुरक्षित निस्तारण के लिए किस तरह के बुनियादी ढांचे की जरूरत है।
इस तरह फैल रहा ई-कचरा
बरेली कॉलेज के पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. जसपाल सिंह ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में बिजली, बैटरी और सर्किट से चलने वाले उपकरण हमारे घरों का हिस्सा बन चुके हैं। ये समय के साथ कबाड़ में तब्दील हो जाते हैं। इनमें पुराने स्मार्टफोन, चार्जर, यूएसबी केबल, ईयरफोन, पावर बैंक, स्मार्टवॉच, टीवी-एसी के रिमोट के सर्किट और छोटे ब्लूटूथ स्पीकर शामिल हैं। डेस्कटॉप, सीपीयू, मॉनिटर, की-बोर्ड, माउस, प्रिंटर, स्कैनर, यूपीएस, राउटर, मॉडम, पुरानी हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव, एलईडी व एलसीडी टीवी, सेट-टॉप बॉक्स, डीवीडी प्लेयर, होम थिएटर और गेमिंग कंसोल भी ई-कचरे की मुख्य वजह हैं।
इसलिए निस्तारण जरूरी
ई-कचरे में लेड, मर्करी, कैडमियम जैसे कई खतरनाक और जहरीले रसायन पाए जाते हैं। इन उपकरणों को सामान्य कचरे के साथ खुले में फेंकने पर ये रसायन रिसकर जमीन के जरिये भूजल को दूषित करते हैं और हवा में मिलकर गंभीर बीमारियां फैलाते हैं। इसलिए इनका सुरक्षित निस्तारण जरूरी है। इनसे निकलने वाले तांबे, सोना, चांदी और एल्युमिनियम जैसी धातुओं को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।