इस दिवाली भले ही कम पटाखे फूटे मगर जितने फूटे, उतने से ही शहर की आबोहवा जहरीली हो गई है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की रिपोर्ट बता रही है कि आसमान में सुबह और शाम को जो धुआं सा दिखाई दे रहा है वह सिर्फ धुंध नहीं है। इस धुंध में जहरीली गैसें भी शामिल हैं जो आतिशबाजी से निकली हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह पर्यावरणीय स्थिति सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। खासतौर से मॉर्निंग वाकर्स को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि यह उनके लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है।
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय और सेंटर फॉर इन्वायरमेंटल स्टडीज के आंकड़ों के अनुसार वातावरण में इन दिनों कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा सामान्य से इतनी ज्यादा है जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। नाइट्रोजन ऑक्साइड 70 से 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और सल्फर डाई ऑक्साइड 50 से 55 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक वातावरण में घुली हुई है। हवा में तैर रहे कार्बन के कण और हैवी मेटल्स सांस के जरिये शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचा सकते हैं। हैवी मेटल्स कैंसर का कारण भी बन सकता है।विशेषज्ञों के अनुसार इन दिनों मौसम में नमी है। कोहरे के साथ यह गैसें पर्यावरण के निचले स्तर पर हैं। रेस्पीरेटरी सस्पेंडेड पर्टीकुलेट मैटर (आरएसपीएम) की मात्रा भी 500 से ज्यादा रिकार्ड की गई है। हालांकि इन दिनों हल्की हवा चल रही लिहाजा उम्मीद की जा सकती है कि तीन दिन में वातावरण में इन गैसों का प्रभाव कम हो जाएगा।
फेफड़े और आंखों को हो सकता है नुकसान
जिला अस्पताल के फिजीशयन डॉ. अजय मोहन के अनुसार कार्बन डाई ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड गैस स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक हैं। पानी से मिलकर यह गैसें सल्फ्यूरिक अम्ल बनाती हैं जो काफी नुकसानदायक होता है। दमा के रोगियों के लिए यह गैसें जानलेवा तक हो सकती है। सामान्य लोगों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। उन्हें छाती और आंखों का इन्फेक्शन हो सकता है।
दो से तीन दिन तक रहेगी यही स्थिति
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनिल कुमार चौधरी के अनुसार धुंध में नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड की मात्रा है जो दो से तीन दिन तक बनी रह सकती। हवा के साथ यह गैसें वातावरण में विलीन हो जाती हैं, लेकिन हैवी मेटल नष्ट नहीं होते।