बरेली। हजरत इमाम हुसैन की अजीम शहादत को याद किया जाने वाला इस्लामी महीना मोहर्रम को लेकर शहर में तैयारियां पूरी हो गईं हैं। ताजियों को सजाने संवारने और इमामबाड़ों में भी रंगाई पुताई का काम अंतिम दौर में हैं।
संभवत: 15 अक्तूबर से मोहर्रम शुरू हो जाएगा। इसे लेकर मुस्लिम बाहुल्य मोहल्लों मेें चहल पहल शुरू हो गई है। खानकाह नियाजिया के इमामबाड़ा सहित पुराना शहर के शाहदाना, कांकर टोला, चक महमूद, मीरा की पेंठ, कटरा चांद खां, सैलानी के आलावा शाहबाद, बानखाना सहित किला के जखीरा, जसोली, मलूकपुर, खन्नू मोहल्ला, दर्जी चौक आदि मोहल्लों के सुन्नी इमामबाड़ों में तैयारियां पूरी हो रही हैं। इसमें दस दिनों के कार्यक्रम तैयार करने के साथ ही जूलूस आदि की भी तैयारी कर ली गई है।
इधर मुहर्रम को लेकर शिया समुदाय में सभी लोग अपने अपने तरीके से मुहर्रम के आगमन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। घरों व इमामबाड़ों में रंगाई पुताई व साफ सफाई का काम अपने अंतिम चरणों में है। मोहल्ला गढै़या के इमामबाड़ा हकीम आगा साहब, इमामबाड़ा सरदार हुसैन, इमामबाड़ा मोहम्मद शाह, इमामबाड़ा वसी हैदर, इमामबाड़ा महबूब हुसैन, मोहल्ला छीपी टोला के इमामबाड़ा मुबारक महल, इमामबाड़ा दीवानखाना एवं ऐतिहासिक इमामबाड़ा फतेह अली शाह मारूफ काला इमामबाड़ा सहित स्वालेह नगर व पुराना शहर के इमामबाड़ों में तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। मजलिस आदि के लिए बाहर से आलिमों को भी तय कर दिया गया है। दूसरी तरफ शिया मातमी अंजुमनों ने भी अपनी अपनी तैयारी कर ली है। इसी तरह महिलाओं की मातमी अंजुमन सुगरा ने भी अपने अपने ओहदेदारों के साथ कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर लिया है।
कसे जाने लगे हैं ढोल ताशे
बरेली। सबसे ज्यादा रौनक इन दिनों जखीरा में हैं। यहां न सिर्फ लोग ताजियेदारी की तैयारी में लगे हैं बल्कि यहां पर ढोल ताशे भी कसे जा रहे हैं। यहां ढोल ताशा बनाने वालों के पास इन दिनों काफी काम है। तख्तो ताजियों के जुलूस में ढोल ताशा बजाने वाले कुछ नया खरीद रहे हैं तो कुछ पुराने खोल पर खाल चढ़वाने या मरम्मत के लिए पहुंच रहेे हैं।