विधायक रोशनलाल वर्मा ने आरोप लगाया कि वह अपनी उपेक्षा से आहत होने के चलते पार्टी छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। उन्होंने जिले के एक बड़े भाजपा नेता पर भी अड़ंगेबाजी करने का आरोप लगाया है।
काफी समय से तिलहर से विधायक रोशनलाल वर्मा के भाजपा छोड़ने की सुगबुगाहट चल रही थी। वर्मा इससे इनकार करते रहे, लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भाजपा को अलविदा कह सपा का दामन थाम लिया। वर्मा अब आरोप लगा रहे हैं कि वह अपनी उपेक्षा से आहत होने के चलते पार्टी छोड़ने पर मजबूर हुए हैं। उन्होंने जिले के एक बड़े भाजपा नेता पर भी अड़ंगेबाजी करने का आरोप लगाया है।
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निगोही निवासी रोशनलाल वर्मा ने सहकारी समिति और यूपी ग्रामीण बैंक से चुनाव लड़कर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। वह निगोही के उप ब्लॉक प्रमुख और ब्लॉक प्रमुख बने। बाद में वह बसपा में शामिल हो गए। 2007 में पहला विधानसभा चुनाव बसपा से निगोही सीट पर लड़ा था।
सपा के कोविद सिंह को 22,800 वोटों से हराकर वह जीते थे। 2012 का चुनाव तिलहर विधानसभा सीट से बसपा से लड़ा और सपा के अनवर अली को 10708 वोटों से हराया। 2017 के चुनाव से ठीक पहले रोशनलाल वर्मा बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने तिलहर से रोशनलाल वर्मा को कांग्रेस-सपा के संयुक्त प्रत्याशी जितिन प्रसाद के खिलाफ उतारा।
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कड़ी टक्कर में तब के कद्दावर कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद को रोशनलाल वर्मा ने 5,715 वोटों से हरा दिया। तब से रोशनलाल वर्मा का कद पार्टी में बड़ा हो गया था। बाद में भाजपा के एक बड़े नेता से टकराव के कारण भी वह चर्चा में रहे थे। भाजपा के कुछ बड़े नेताओं से उनके मतभेद बार-बार उभरकर सामने आते रहते थे।
मगर कुछ दिन पहले तक रोशनलाल वर्मा दूसरे दल में जाने की बात को अफवाह बताकर खंडन करते रहते थे। स्वामी प्रसाद मौर्या के इस्तीफे की चिट्ठी लेकर राजभवन पहुंचे रोशनलाल वर्मा ने उन्हें अपना नेता बताते हुए अनुसरण करने की बात कही है। वहीं रोशनलाल वर्मा के तमाम समर्थक लखनऊ पहुंच गए थे।
बड़े नेता पर लगाए आरोप
विधायक रोशनलाल वर्मा ने बताया कि वह पार्टी में अड़ंगेबाजी से काफी परेशान थे। पार्टी में लगातार उनकी उपेक्षा की जा रही थी। इसके अलावा पार्टी में दलितों, पिछड़ों और बेरोजगारों की उपेक्षा की जा रही थी। उन्होंने कहा कि पार्टी में उन्हें काम नहीं करने दिया जा रहा था। जिले के एक बड़े नेता उनके काम में अड़ंगा लगाते थे।
उन्होंने इसकी शिकायत भी कई बार प्रदेश नेतृत्व से की थी, मगर कोई सुनवाई नहीं की गई। इसी से आहत होकर उन्होंने भाजपा को छोड़ा है। उन्होंने बताया कि वह लखनऊ से वापस लौट रहे हैं। जगह-जगह रास्ते में उनका समर्थक और कार्यकर्ता स्वागत कर रहे हैं। वह सपा से तिलहर विधानसभा सीट पर चुनाव लड़ेंगे। उनकी पार्टी नेतृत्व से बात हो चुकी है। जल्द सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
जिन्होंने पांच साल में जनता का काम नहीं किया, वे टिकट कटने की आशंका में दूसरे दल में जा रहे हैं। भाजपा में रहकर अंत्योदय के लिए कार्य करना पड़ता है। यहां पर सिर्फ विधायक बनकर नहीं रह सकते। उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं है, जो जनता की सेवा नहीं करना चाहते। सपा और बसपा की तरह यहां पर साम्राज्य खड़ा करने की इजाजत नहीं मिलती। - हरिप्रकाश वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष
सपा विधायक बोले, अफवाह फैलाने वालों पर करेंगे कार्रवाई
मंगलवार को स्वामी प्रसाद मौर्य के मंत्री पद से इस्तीफा के बाद उनके नेतृत्व में कई भाजपा नेताओं के जल्द ही सपा ज्वाइन करने की चर्चाओं से सबसे ज्यादा खलबली जलालाबाद विधानसभा में रही। क्षेत्र के एक भाजपा नेता की स्वामी प्रसाद के साथ सपा में जाने की चर्चा पहले से ही चल रही थी।
अभी तक भाजपा के टिकट को लेकर चल रही बहसबाजी का रुख इस घटनाक्रम के बाद घूमकर सपा के टिकट पर जाकर ठहर गया। चर्चाओं के अनुसार यहां से सपा का टिकट फाइनल हो जाने पर ही क्षेत्र के एक नेता भाजपा छोड़ रहे हैं। भाजपा के यह नेता कई दिनों से लखनऊ में ही डेरा जमाये हुए थे।
सपा के टिकट में फेरबदल होने की चर्चा ने उस समय और तेजी पकड़ ली जब क्षेत्र के मौजूदा सपा विधायक शरदवीर सिंह मंगलवार दोपहर में ही लखनऊ को रवाना हो गए। पार्टी बदलने की चर्चा पर सपा विधायक शरदवीर सिंह ने बताया कि सब भ्रामक अफवाहें फैलाई जा रही हैं।
सपा पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी सिटिंग विधायक के टिकट में फेरबदल नहीं किया जाएगा। वह न केवल सपा से चुनाव लड़ेंगे, बल्कि जीतेंगे भी। बताया कि उनका लखनऊ में पार्टी नेताओं से मुलाकात करने का कार्यक्रम पहले से ही निर्धारित था। विरोधी अफवाह फैला रहे हैं।