बरेली। हरित आवरण को बढ़ाने और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए वन विभाग रामपुर रोड के किनारे अपने कार्यालय के बाहर छह जगह मियावाकी वन तैयार करेगा। इसी माह यहां यहां खाली पड़ी भूमि पर 10 हजार पौधे रोपे जाएंगे। वन रेंजर वैभव चौधरी ने बताया कि यह जापानी तकनीक है। इसकी मदद से कम समय और कम जगह में घने वन विकसित किए जाते हैं। चिह्नित जमीन पर उपजाऊ मिट्टी डाली जा रही है। जल्द ही वहां पौधरोपण के लिए क्यारियां तैयार की जाएंगी।
विभाग की ओर से यहां जैव विविधता को बढ़ाने वाली और स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल अलग-अलग प्रजातियों के पौधे रोपे जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से आम, जामुन, अशोक, पीपल और बरगद जैसी पारंपरिक और महत्वपूर्ण किस्में शामिल होंगी। पौधे लगाने के बाद उनकी सुरक्षा के लिए सभी छह स्पॉट को खंभे लगाकर जाली और तार से चारों ओर से बंद किया जाएगा, ताकि वे तेजी से विकसित हो सकें। इससे पहले भी विभाग की ओर से 14 स्पॉट पर मियावाकी वन विकसित किए गए हैं।
जानिए, क्या होती है मियावाकी तकनीक
यह तकनीक शहरी क्षेत्रों या खाली पड़े छोटे भूखंड पर सघन वन तैयार करने के लिए जानी जाती है। सबसे पहले मिट्टी को उपजाऊ बनाया जाता है। फिर प्रति वर्गमीटर तीन से पांच स्थानीय प्रजातियों के पौधे रोपे जाते हैं। सघन रोपण के कारण पौधों में प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्धा होती है और वे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं। दो-तीन वर्षों में ही वहां घना जंगल तैयार हो जाता है।
वर्जन
एनकैप के तहत हरियाली बढ़ाने की जिम्मेदारी हमें दी गई है। इसके तहत सीबीगंज में काम शुरू हो चुका है, पौधे लगाए जा रहे हैं। नवंबर में कार्य को पूर्ण करने का लक्ष्य है। - दीक्षा भंडारी, डीएफओ