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तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते गए मिथिलेश कुमार

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मिथिलेश कुमार ।
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पुवायां। क्षेत्र के गांव अगौना के रहने वाले मिथिलेश कुमार साधारण पृष्ठभूमि से राजनीति में आए हैं। वर्ष 2002 में वह पहली बार पुवायां विधानसभा सीट (सुरक्षित) से निर्दलीय विधायक बने थे। 2009 में उन्होंने सपा के टिकट से लोकसभा चुना लड़ा और जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे। फिर 2012 में मिथिलेश की पत्नी शकुंतला देवी सपा से पुवायां सीट से विधायक बनीं। 2014 में मिथिलेश भाजपा की कृष्णाराज से चुनाव हार गए।
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सपा की सरकार होने के चलते और पत्नी के विधायक होने की वजह से सत्ता में प्रभावी बने रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने सपा छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। हालांकि लोकसभा का टिकट उन्हें नहीं मिला। जून 2021 में मिथिलेश के सितारे फिर चमके और उन्हें एससी एसटी आयोग का उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया। कठेरिया समाज से आने वाले मिथिलेश कुमार को उच्च सदन में भेजकर अब भाजपा अनुसूचित जाति के वोट बैंक में पकड़ मजबूत करना चाहती है।
पार्टी की अपेक्षाओं पर खरा उतरूंगा : मिथिलेश
शाहजहांपुर। लोकसभा सदस्य रहे मिथिलेश कुमार अब राज्यसभा भेजे जाएंगे। रात दस बजे पार्टी मुख्यालय से कॉल आते ही मिथिलेश कुमार के पुवायां स्थित आवास पर बधाई देने को लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मिथिलेश ने कहा कि वह पार्टी और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे।
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मिथिलेश कुमार ने मोबाइल पर बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व का आशीर्वाद मिला है। जनता की सेवा का एक बार फिर से अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि पार्टी और लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करूंगा। मिथिलेश के मुताबिक सोमवार रात 10 बजे उन्हें राज्यसभा का टिकट मिलने की जानकारी हो सकी। पार्टी नेतृत्व का वह बहुत आभार जताते हैं। संवाद
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