बुजुर्ग मां और छोटे भाई की देखरेख के साथ दो बहनों की शादी का था तनाव
बरेली। एक तरफ लॉकडाउन में नौकरी छूट जाने की वजह से बेरोजगार होने की कसक और दूसरी तरफ वृद्ध मां के साथ दो बहनों और छोटे भाई का पेट भरने की जिम्मेदारी, साल भर तक इस कशमकश में घिरे रहने के बाद बारादरी के मोहल्ला चक महमूद में रहने वाले 20 वर्षीय अमन मौर्य ने रविवार रात अपने घर में ही फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली।
अमन के चचेरे भाई सुनील मौर्य ने बताया कि वह चक महमूद की नमकीन फैक्टरी में कारीगर थे। पिछले साल लॉकडाउन में फैक्टरी बंद हुई तो उनकी नौकरी छूट गई थी। लॉकडाउन के बाद फैक्टरी खुली तो अमन ने दोबारा काम शुरू किया लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ते ही फैक्टरी फिर बंद हो गई। पिता लालता प्रसाद मौर्य की डेढ़ साल पहले ही मौत हो चुकी थी लिहाजा इसलिए परिवार की पूरी जिम्मेदारी अमन पर ही थी। परिवार में उनके अलावा मां ओमवती, 17 वर्षीय बहन सोनम, 14 वर्षीय अंतिका और सात वर्षीय भाई नितिन है। नमकीन फैक्टरी में सात-आठ हजार रुपये महीने की नौकरी में पहले ही मुश्किल से गुजारा होता था। नौकरी जाने के बाद परिवार के खाने के भी लाले पड़ गए थे। बहन की शादी की चिंता अलग परेशान कर रही थी।
सुनील ने बताया कि शनिवार दोपहर खाना खाने के बाद अमर पहली मंजिल पर बने कमरे में चला गया और फिर नीचे नहीं उतरा। रात करीब दस बजे सुनील अपने भाई विशाल के साथ उसे खाना खाने के लिए बुलाने पहुंचे तो जीना का दरवाजा अंदर से बंद था। कई आवाजें देने पर भी दरवाजा नहीं खुला। पड़ोसी के घर से होकर वे लोग छत पर पहुंचे तो कमरा भी अंदर से बंद मिला। खिड़की से झांककर देखा तो अंदर अमन का शव फंदे पर लटक रहा था। खिड़की से अंदर जाकर उन लोगों ने दरवाजा खोला और शव नीचे उतार लिया। पड़ोसियों के मुताबिक परिजन ने अमन की खुदकुशी की सूचना पुलिस को नहीं दी और सोमवार सुबह अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच बारादरी पुलिस मौके पर पहुंच गई और शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया।
सदमे में मां, कैसे होगी बेटियों की शादी
परिवार में अमन बड़ा था और घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। उसकी मौत से परिवार वालों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अमन की मां ओमवती का कहना है कि उन्हें कुछ समय बाद बेटी की शादी करनी थी मगर अब कौन शादी कराएगा।
तंगी बनी मौत का घेरा सेल्समैन ने खाया जहर
सुभाषनगर की विकासनगर कॉलोनी में रहने वाले कन्फेक्शनरी सेल्समैन संजीव कुमार शर्मा ने 11 जून को जहर खाकर इसलिए खुदकुशी कर ली थी क्योंकि उन पर दो वितरकों के 90 हजार रुपये और एक सूदखोर का कर्ज था जिसे वह लॉकडाउन में काम बंद होने की वजह से चुका नहीं पा रहे थे। कर्ज देने वालों का ज्यादा दबाव पड़ा तो संजीव ने खुदकुशी कर ली।
फंदे पर लटका युवा कारोबारी
प्रेमनगर के मोहल्ला ब्रह्मपुरा निवासी युवा कारोबारी सचिन ने भी पिछले दिनों अपने निर्माणाधीन मकान में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी। सचिन ने अपने कारोबार और मकान बनाने के लिए बैंक से ऋण लिया था लेकिन लॉकडाउन में काम चौपट होने की वजह से वह ऋण की किस्तें नहीं चुका पा रहे थे। उन पर भी बैंक वाले कर्ज चुकाने का दबाव बना रहे थे।
पूरे परिवार के साथ खुदकुशी
मूलरूप से फरीदपुर के रहने वाले दवा कारोबारी अखिलेश गुप्ता ने पिछले दिनों शाहजहांपुर में अपनी पत्नी रिशु, बेटे शिवांग और बेटी हर्षिता के साथ खुदकुशी कर ली थी। अखिलेश एक तरफ सूदखोरों के चंगुल में फंसे थे और दूसरी तरफ लॉकडाउन में कारोबार की हालत खराब हो गई थी।
मनोवैज्ञानिक डॉ. सुविधा शर्मा का कहना है कि आर्थिक तंगी हर किसी को मानसिक रूप से बेहद प्रभावित करती है। कई बार तंगी में पारिवारिक स्थिति बिगड़ती है तो व्यक्ति अवसाद का शिकार होने लगता है, भविष्य को लेकर उसके मन में अनिश्चितता पैदा हो जाती है। मन में घबराहट होने लगती है। कई बार परिवार में भी कलह का माहौल बन जाता है जो अवसाद को और बढ़ा देता है। ऐसे में उसे इस सबसे निजात पाने के लिए खुदकुशी का ही रास्ता सूझता है। इस स्थिति को सुधारने में परिवार की अहम भूमिका होती है। घर में सकारात्मक माहौल बनाना चाहिए। झगड़ा हो तो फौरन सुलझा लेना चाहिए। कोई अगर तंगी से गुजर रहा हो तो दूसरों की मदद लेने में भी संकोच नहीं करना चाहिए।