बरेली। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिले में करोड़ों रुपये से बनाए गए भवन मानव संसाधन के अभाव में धूल फांक रहे हैं। बीते एक दशक में 300 बेड अस्तपाल, रिठौरा सीएचसी, ट्रॉमा विंग, एल्डरली वार्ड बने, पर इनका लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा। गंभीर दुर्घटनाग्रस्त मरीज हायर सेंटर भेजे जा रहे हैं। इलाज के लिए उनको लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। कई बार यह जानलेवा भी साबित होता है।
दो वर्ष बाद भी नहीं शुरू हुआ एक्सीडेंटल इमरजेंसी यूनिट
जिला अस्पताल में पांच वर्ष पूर्व डेढ़ करोड़ से कम्प्रेहैंसिव मेडिकल सर्जिकल एवं एक्सीडेंटल इमरजेंसी यूनिट (ट्राॅमा विंग) का निर्माण शुरू हुआ। वर्ष 2023 में निर्माण पूरा हुआ। चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ तैनाती और उपकरणों की खरीद के लिए शासन को पत्र भेजे गए, लेकिन न तो मानव संसाधन मिले, न ही उपकरण ही मुहैया कराए गए। एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक तीन ईएमओ की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो गई है। अन्य मानव संसाधन और उपकर मिलते ही संचालन शुरू हो जाएगा।
कभी चरागाह तो कभी मौन पालन केंद्र बने भवन
रिठौरा के धर्मपुर वार्ड में वर्ष 2016-17 में करीब पांच करोड़ के बजट से सीएचसी का निर्माण शुरू हुआ। वर्ष 2022 में निर्माण पूरा हुआ, पर निगरानी के अभाव में कभी चरागाह तो कभी मौन पालन केंद्र की तरह भवन का प्रयोग हो रहा है। संसाधनों के अभाव में सीएचसी का संचालन नहीं हुआ। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक सीएचसी संचालन के लिए वॉक इन इंटरव्यू से चिकित्सकों की भर्ती की जाएगी। परिसर में लैब और अन्य उपकरण जल्द लगवा जाएंगे।
धूल फांक रहा करोड़ों का भवन और आईसीयू
गंभीर मरीज और दुर्घटनाग्रस्त घायलों के इलाज के लिए करीब 15 एकड़ परिसर में 85 करोड़ के बजट से आठ वर्ष पूर्व तीन सौ बेड अस्पताल का निर्माण हुआ। करोड़ों के वेंटिलेटर आदि आधुनिक उपकरण लगे, पर चिकित्सक व अन्य स्टाफ के अभाव में धूल फांक रहे हैं। कोरोना में अधूरी सुविधाओं के साथ ओपीडी शुरू हुई। सीटी स्कैन यूनिट बनी, पर बिजली आपूर्ति न होने से मरीज परेशान होते हैं। प्रभारी सीएमएस डॉ. इंतजार हुसैन के मुताबिक अस्पताल के लिए शासन-प्रशासन स्तर पर प्रयास चल रहा है। अस्पताल में उपकरण हैं, मानव संसाधन मिले तो संचालन शुरू हो जाएगा।
इमरजेंसी वार्ड की तरह हो रहा एल्डरली वार्ड का इस्तेमाल
जिला अस्पताल में बुजुर्ग मरीजों को भर्ती करने के लिए वर्ष 2016 में 50 लाख के बजट से 10 बेडेड एल्डरली वार्ड का निर्माण शुरू हुआ। 2017 में निर्माण पूरा हुआ, लेकिन अब तक वार्ड बुजुर्गो के लिए आरक्षित नहीं हो सका। इसका इस्तेमाल इमरजेंसी वार्ड की तरह हो रहा है। आपात स्थिति में इस वार्ड में मरीज भर्ती हो रहे हैं। एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक एल्डरली वार्ड के लिए अतिरिक्त स्टाफ चाहिए, जो उपलब्ध नहीं है। वार्ड का जरूरत के अनुसार उपयोग किया जा रहा है। ब्यूरो