नोटबंदी के बाद लगता था जैसे बाजारों की रौनक को सांप सूंघ गया। उस पर जीएसटी के हौवे ने व्यापारियाें और खरीदारों में खौफ बैठा रखा था। अब तक बाजार में पड़े सूखे से परेशान व्यापारियों ने सारे कायदे ताक पर रखकर ग्राहकों के लिए सभी रास्ते खोले और खरीदारों ने भी नोट बंदी-जीएसटी के खौफ की झिझक तोड़कर अपनी तिजोरी खोल दीं। पिछली चार दिवाली के आंकड़े देखें तो सारे रिकार्ड तोड़ते हुए इस वर्ष करीब 35 फीसदी ज्यादा कारोबार हुआ है। यानी सारी सुस्ती-मंदी तोड़कर जमकर धन बरसा। यह दीगर बात है कि अब तक करीब 800 करोड़ रुपये से ज्यादा हुए कारोबार में 90 फीसदी कैश सेल की खबरें हैं। यानी पर्चे पर व्यापार हुआ और व्यापारी इसे किस तरह सारे नियम- कायदे तोड़कर अपने रिकार्ड में दिखाएंगे और संबंधित विभाग सेल के इस खेल को किस तरह लेंगे, यह सवाल भी व्यापारियों के दिमाग में है। हालांकि बाजार में लौटी रौनक से हर कोई पहले से खुश है।
छोटी दिवाली पर भी बाजार में रौनक बनी रही। लगभग सभी बाजारों देर रात ग्राहक जमे रहे। बुधवार के दिन रोशनी और पटाखा आइटम ज्यादा बिके। सराफा बाजार भी गुलजार रहा। गुरुवार को बड़ी दिवाली पर तमाम लोगों ने ज्वेलरी खरीदने के लिए बुकिंग करा रखी है।
कुछ ऐसी रही बाजार की चाल
वर्ष कारोबार (करोड़ रुपये)
2013 396
2014 544
2015 550
2016 595
2017 800 पार (अनुमानित)