बरेली। दिल्ली-लखनऊ के बीच सबसे व्यस्त स्टेशनों में शुमार बरेली जंक्शन के रेलवे अस्पताल में अपग्र्रेड किया जाएगा। यहां यात्रियों सहित रेलकर्मियों और उनके आश्रितों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। फिलहाल, यहां सर्दी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों की दवाएं ही मिल पाती हैं। अन्य मरीजों को रेफर करना ही एक मात्र विकल्प है।
जंक्शन से रोजाना औसतन 96 मेल, एक्सप्रेस, फास्ट और सुपर फास्ट ट्रेनों के जरिये 40-45 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। इसके बावजूद यहां का रेलवे अस्पताल सर्दी-खांसी, जुकाम-बुखार के इलाज से आगे नहीं बढ़ पाया है। स्टाफ की भी कमी है। अस्पताल की ओपीडी में हर माह औसतन 1200-1500 मरीज आते हैं। गंभीर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। मुरादाबाद स्थित मंडलीय अस्पताल में भी सुविधाओं का अभाव है।
जंक्शन पर अगर कोई यात्री ट्रेन की चपेट में आकर घायल हो जाता है तो रेलवे अस्पताल में उसके लिए प्राथमिक चिकित्सा तक की व्यवस्था नहीं है। घायल को रेफर करने की दशा में कई बार उसकी जान पर बन आती है।
पांच साल से चल रही कवायद
रेलवे अस्पताल को अपग्रेड करने की कवायद पांच साल से चल रही है, लेकिन यह आगे नहीं बढ़ पा रही। अब जंक्शन को रेलवे हब के रूप में विकसित करने के साथ ही मुरादाबाद-लखनऊ के बीच फोर लेन रेल लाइन प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू हो गया है। अगले 50 साल की जरूरतों के हिसाब से जंक्शन को विकसित किया जाना है। इनमें रेलवे अस्पताल भी शामिल है। संवाद
ये सुविधाएं मिलेंगी
- विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी।
- पैथालॉजी, ईसीजी और एक्सरे जांच की सुविधा मिलेगी।
- माइनर ऑपरेशन थिएटर, इमरजेंसी सेवाएं भी शुरू की जाएंगी।
- नेत्ररोग विशेषज्ञ व सर्जन की तैयारी के बाद मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए दौड़ नहीं लगानी होगी।
- बाल रोग और महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती भी की जाएगी।
- मिनी ट्राॅमा सेंटर का निर्माण भी प्रस्तावित है।
- ऑर्थोपेडिक सर्जन की तैनाती के बाद हड्डियों के फ्रैक्चर होने की दशा में ऑपरेशन व प्लास्टर आदि की सुविधा जंक्शन पर ही मिलेगी।
वर्जन
जंक्शन पर कई विकास योजनाएं प्रस्तावित हैं। रेलवे अस्पताल को भी अपग्रेड किया जाएगा। इससे यहां बेहतर चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। - सैय्यद इमरान, मुख्य वाणिज्य निरीक्षक