बरेली। महिला अस्पताल के एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में वर्ष 2017 में भवन निर्माण के समय ही खराब मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (एमसीबी) बॉक्स लगाया गया था। इन सात वर्षों में इसकी कोई जांच नहीं हुई। महिला अस्पताल का इलेक्ट्रिकल सिस्टम ओके की रिपोर्ट देता रहा। जिम्मेदार अधिकारी इसी रिपोर्ट को आगे बढ़ाते रहे। उन्होंने किसी दूसरी संस्था से सिस्टम का ऑडिट तक नहीं कराया। नतीजा यह हुआ कि मंगलवार को शॉर्ट सर्किट से हुए हादसे में एक नवजात की मौत हो गई। एमसीबी बॉक्स खराब होने के कारण ही फाल्ट होने पर मंगलवार को ट्रिपिंग नहीं हुई। अब अधिकारी इस लापरवाही की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने का प्रयास कर रहे हैं।
हादसे के बाद डीएम का ध्यान गया तब जमीनी स्तर पर जांच शुरू हुई। पता लगा कि जब से एमसीबी बॉक्स लगा है तभी से वह खराब है। डीएम की ओर से गठित जांच समिति ने प्रारंभिक जांच में पाया है कि एमसीबी बाॅक्स तो लगा है, लेकिन फाल्ट के समय ट्रिपिंग नहीं हुई। नतीजा शाॅर्ट सर्किट के रूप में सामने आया। अगर बिल्डिंग के हैंडओवर के समय तत्कालीन सीएमएस ने किसी विद्युत विशेषज्ञ के जरिए सिस्टम को चेक कराया होता तो खराब एमसीबी बाॅक्स की जानकारी हो जाती। उसे बदला जाता, लेकिन सुरक्षा मानकों की कदम-कदम पर अनदेखी हुई।
जानकारों का कहना है कि अगर किसी अफसर को बचाने की कोशिश न की गई तो मौजूदा जांच में ही हकीकत का हर पहलू उजागर हो जाएगा। महिला अस्पताल की तत्कालीन सीएमएस, कार्यदायी संस्था के तत्कालीन अभियंता जांच से सवालों के घेरे में आएंगे। जवाबदेही तय होगी, अगर सभी पहलू शामिल किए गए तो वे अफसर भी नहीं बच जाएंगे, जिन्होंने वायरिंग की चेकिंग के बगैर ही एसएनसीयू के भवन का कार्यदायी संस्था से स्थानांतरण करा लिया था। विद्युत सुरक्षा जांच के सवाल पर विद्युत सुरक्षा विभाग के अधिकारी अजय चौधरी ने बताया कि जांच चल रही है। साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।
ऐसे समझिए लापरवाही की कहानी
- फाल्ट हुआ तब अस्पताल की बिजली आपूर्ति ऑटोमेटिक बंद नहीं हुई। कर्मचारी ने आपूर्ति बंद की। विद्युत सुरक्षा का सिस्टम अस्पताल में नहीं दुरुस्त नहीं था।
- विद्युत सुरक्षा निदेशालय की टीम ने जब एमसीबी बाॅक्स देखा तो खराब मिला। उसमें मैनुअल स्विच और प्लग लगे मिले, जिनके फ्यूज फाल्ट के वक्त उड़े नहीं। वायरिंग जलने लगी। धुआं उठा और अफरातफरी मच गई।
- अगर ऑटोमेटिक एमसीबी लगी होती तो फाल्ट के तुरंत बाद ही आपूर्ति बंद हो जाती और न केबल जलती और न ही बड़ा हादसा होता, लेकिन सिस्टम को अपडेट और ठीक करने पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। हर तरीके से इसमें लापरवाही बरती गई।
(विद्युत सुरक्षा की टीम ने पकड़ीं यह कमियां )
एसएनसीयू में मरम्मत, आवाजाही रही प्रतिबंधित
एसएनसीयू वार्ड में जल चुकी वायरिंग को दुरुस्त करने का कार्य बृहस्पतिवार को दिनभर जारी रहा। साथ ही, वार्ड और यूनिट में आग की लपटों से काली पड़ चुकीं दीवारों की रंगाई-पुताई भी होती रही। इसके चलते वार्ड की ओर आवाजाही प्रतिबंधित रही। अस्पताल में जांच टीम ने कंगारू मदर केयर यूनिट के प्रवेश द्वार की ओर लगे एमसीबी पैनल समेत अस्पताल के प्रथम तल पर लगी मेन सप्लाई लाइन भी चेक की।
सीएमएस बोले- हादसे के बाद पता चला, एमसीबी पुरानी है
महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक बिजली मिस्त्री ने वायरिंग दुरुस्त करने के दौरान बताया कि एमसीबी पैनल पुरानी तकनीक का है। पिछले माह उन्होंने चार्ज संभाला था, लेकिन घटना से पहले यह जानकारी नहीं थी। पहले कोई घटना भी नहीं हुई थी। लिहाजा, पैनल क्रियाशील है या नहीं? इस बारे में जानकारी नहीं हो सकी। शॉर्ट सर्किट दीवार के अंदर से गुजर रही लाइनों में हुआ था। बाहर से सर्किट या एमसीबी पैनल देखकर इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि अंदर क्या दिक्कत है। जांच रिपोर्ट आए तो स्थिति साफ होगी। अस्पताल में दो बिजली मिस्त्री हैं। एक स्थायी और दूसरा संविदा पर तैनात है। दोनों में से किसी ने भी पहले विद्युत सुरक्षा संबंधी आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
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तार और स्विच की गुणवत्ता पर सवाल
जांच के दौरान वायरिंग को विद्युत सुरक्षा के मानकों पर भी कसा जा रहा है। क्योंकि जब भी कोई इमारत बनती है तो उसमें एमसीबी बाॅक्स से लेकर वायरिंग के तार और लोड के हिसाब से स्विच तक भारतीय मानक ब्यूरो (आईएसआई) मानक का पालन करने वाली कंपनी के ही लगाए जाने चाहिए। इसके बावजूद ठेकेदार कमाई के चलते फर्जी आईएसआई मार्क के तार और स्विच व एमसीबी बाॅक्स लगा देते हैं। सूत्रों के मुताबिक यही एसएनसीयू में हुआ।
विद्युत सुरक्षा की टीम ने रिकाॅर्ड तलब किए
विद्युत सुरक्षा विभाग की टीम ने हादसे के 24 घंटे बाद बुधवार को दिन में जांच की और रिकॉर्ड तलब किए। किस संस्था ने भवन बनाया था, किसने वायरिंग की? वायरिंग में किस कंपनी का तार और एमसीबी लगाए जाने का दावा है? क्या उसी कंपनी का सामान लगा है या नहीं। तार और एमसीबी लोड के हिसाब से लगी हैं या नहीं? यह जानने का प्रयास किया गया।
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इन सवालों पर हो जांच
1- वायरिंग, स्विच और केबिल की गुणवत्ता।
2- एमसीबी किसी कंपनी की थी या लोकल।
3- सिस्टम की गुणवत्ता नहीं थी तो एनओसी कैसे मिल गई।