'सबका साथ सबका विकास' का नारा खोखला
शहाबुद्दीन ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने 'सबका साथ सबका विकास' और 'सूफी विचारधारा' का नारा दिया था, मगर ये दोनों नारे खोखले साबित हो गए। न मुसलमानों को साथ लिया गया और न ही सूफी विचारधारा को बढ़ाने का काम किया। दूसरी तरफ कांग्रेस ने अपने समय कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ाया। उत्तर प्रदेश में यही काम समाजवादी पार्टी ने किया। प्रधानमंत्री के दावों की खुद ही उनके लोगों ने हवा निकाल दी कि उत्तराखंड की धामी सरकार ने दो दर्जन से ज्यादा सूफियों की मजारों को तोड़ा है।
मौलाना ने सरकार और राजनीतिक दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा में 'पैगंबर-ए-इस्लाम बिल' संसद में पास किया जाए , ताकि कोई भी व्यक्ति पैगंबर-ए-इस्लाम की शान में गुस्ताखी न कर सके। 2024 के लोकसभा चुनाव में जो राजनीतिक दल बिल को पास करने पर सहमति जताएंगी मुसलमान उन्हीं को वोट देगा।