विश्व पशु चिकित्सा दिवस पर भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में शनिवार को गोष्ठी हुई। इसमें भारत सरकार में स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के पूर्व सचिव तथा भारतीय औषधि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक डॉ. विश्व मोहन कटोच ने पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य पर जोर दिया। कहा कि यदि हम अपना स्वास्थ्य अच्छा चाहते हैं तो हमें परजीवी रोग, विषाणु जनित रोग, जीवाणु रोग, खाद्य जनित रोगों पर नियंत्रण करना होगा, तभी मानव एवं पशु उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं।
शेरे-ए-कश्मीर कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू के पूर्व कुलपति डॉ. नागेन्द्र शर्मा ने पशु चिकित्सा से जुड़े वैज्ञानिक एवं मानव चिकित्सा से जुड़े चिकित्सकों में तालमेल पर जोर दिया। कहा कि आज के परिवेश में अधिकतर बीमारी पशुओं से मानव में प्रवेश कर रही हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने कहा आईवीआरआई से रिंडरपेस्ट, ग्लैंडरस बीमारी का उन्मूलन किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त परजीवी रोग, क्षय रोग, स्माल पाक्स, रैबीज, एंथ्रेक्स पर भी कार्य किया गया है। केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. जगमोहन कटारिया, निदेशक के वैज्ञानिक सलाहकार डा. सत्यवीर सिंह मलिक समेत एसआरएमएस मेडिकल कालेज, रुहेलखण्ड मेडिकल कालेज के चिकित्साविद तथा संस्थान के सभी संयुक्त निदेशक, विभागाध्यक्ष, छात्र उपस्थित रहे।
पशुओं का परीक्षण किया
आईवीआरआई के पॉलीक्लीनिक में विश्व पशुचिकित्सा दिवस पर लगाए गए कैंप में 235 पशुओं का दंत और हृदय परीक्षण किया गया। रैबीज के टीके भी लगाए गए। इस मौके पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन कई दवा कंपनियों की ओर से किया गया। फोटोग्राफी, पेंटिंग, रंगोली और क्लीनिकल प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में प्रभारी डॉ. अमरपाल और कार्यक्रम संयोजक डॉ. मुजम्मल हक का सहयोग रहा। वहीं, पशुपालन विभाग की ओर से शहर में चार स्थानों पर कैंप लगाकर कुत्तों का रैबीज टीकाकरण किया गया। गांधी उद्यान, रुहेलखंड यूनिवर्सिटी गेट, डीडी पुरम चौराहा और कर्मचारी नगर में कैंप के आयोजन हुए।