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गिड़गिड़ाते रहे परिजन... वेंटिलेटर मिला न ऑक्सीजन, युवक ने तोड़ दिया दम

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फरीदपुर। प्रशासन की रिपोर्ट अनुसार भले बुधवार को शहर के अस्पतालों में आठ वेंटिलेटर, 16 आईसीयू और 238 ऑक्सीजन बेड खाली हों, लेकिन बुधवार को हालत बिगड़ने पर एक युवक लेकर परिजन अस्पताल दर अस्पताल भटकते हुए उसे भर्ती करने के लिए गिड़गिड़ाते रहे, मगर किसी भी अस्पताल में उसे भर्ती नहीं किया गया। बिथरी विधायक की सिफारिश पर एक अस्पताल में उसे भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन आधा घंटा रोककर वेंटिलेटर की सख्त आवश्यकता बताकर लौटा दिया गया। दोपहर तीन बजे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाते हुए युवक ने दम तोड़ दिया।
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क्षेत्र के गांव अमरेख निवासी विनोद शार्म के 20 वर्षीय बेटे विकास की कई दिनों से तबीयत खराब चल रही थी। तीन दिन पहले तबीयत बिगड़ने पर परिवार वाले ने उन्हें फरीदपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां जांच में पीलिया की पुष्टि हुई। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती चली गई। बुधवार को डॉक्टर ने वेंटिलेटर या ऑक्सीजन बेड की जरूरत बताकर बरेली ले जाने को कहा। परिजन विकास को लेकर बरेली के अस्पतालों में भटकते रहे, लेकिन किसी भी अस्पताल में उसे भर्ती नहीं किया गया। बिथरी विधायक की सिफारिश पर दोपहर 12 बजे पीलीभीत बाईपास स्थित एक अस्पताल में उसे भर्ती किया गया, लेकिन कोविड जांच करने के बाद रिपोर्ट निगेटिव आने पर वेंटिलेटर की सख्त जरूरत बताकर आधा घंटे बाद लौटा दिया गया। इसके बाद परिजन पीलीभीत बाईपास स्थित कई अस्पतालों में गए और विकास को भर्ती करने के गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन सभी नहीं ऑक्सीजन की किल्लत बताकर उसे भर्ती नहीं किया। जब परिजन को कुछ भी समझ नहीं आया तो वे फिर उसे फरीदपुर सीएचसी लेकर पहुंचे। जहां से उसे तीन सौ बेड अस्पताल रेफर कर दिया। बरेली लाते समय करीब तीन बजे विकास ने रास्ते में दम तोड़ दिया।
अस्पताल में खाली था वेंटिलेटर बेड फिर भी नहीं मिला
विकास के बड़े भाई विशाल शर्मा के मुताबिक बिथरी विधायक पप्पू भरतौल की सिफारिश पर पीलीभीत बाईपास स्थित एक अस्पताल में आधा घंटा रखने के बाद जब उनसे वेंटिलेटर बेड की सुविधा वाले अस्पताल में ले जाने को कहा गया तो वह पीलीभीत बाईपास रोड पर सभी अस्पतालों में भाई को लेकर भटकते रहे, लेकिन सभी जगह से उन्हें वेंटिलेटर बेड खाली न होने की बात कहकर लौटा दिया गया। हालांकि प्रशासन की बुधवार को अस्पतालों में खाली बेड की स्थिति को लेकर जारी रिपोर्ट के मुताबिक पीलीभीत बाईपास के जिस निजी अस्पताल से विकास को वेंटिलेटर पर ले जाने को कहा गया उससे चंद कदम की दूरी पर स्थित एक अस्पताल में वेंटिलेटर बेड खाली था। इसके अलावा इसी रोड पर मॉल के पास स्थित निजी अस्पताल में भी एक वेंटिलेटर बेड खाली था।
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