पिछले दस दिन से चकरघिन्नी बनी जरीफनगर पुलिस और एटीएस ने आखिरकार फेसबुक प्रकरण का खुलासा कर दिया। पुलिस ने फेसबुक पर धमकी देने की पोस्ट डालने वाले को गिरफ्तार भी कर लिया है। यह आरोपी और कोई नहीं, बल्कि सराफा व्यापारी का भतीजा निकला। उसने अपने चाचा को फंसाने के लिए यह चाल चली थी लेकिन कामयाब नहीं हो सका और खुद फंस गया।
इंस्पेक्टर पंकज लवानिया ने रविवार शाम इसका खुलासा करते हुए बताया कि सराफा व्यापारी दिलीप वर्मा दो भाई थे। कुछ साल पहले सराफा व्यापारी चोरी का माल खरीदते वक्त गाजियाबाद में पकड़ा गया था। उसकी जमानत बड़े भाई रामकुमार वर्मा ने कराई थी। उसके बाद बड़ा भाई बीमार हो गया और उसकी करीब चार साल पहले मौत हो गई, तभी से रामकुमार वर्मा का बेटा अरविंद कुमार वर्मा अपने चाचा दिलीप वर्मा से रंजिश मान रहा था। उसे लगता था कि चाचा दिलीप ने उसके पिता का इलाज नहीं कराया था। वह अंदर ही अंदर दिलीप को फंसाने की साजिश रच रहा था। अरविंद अजयपाल के मकान में किराए पर रहता था। इसका फायदा उठाते हुए अरविंद ने अजयपाल के मोबाइल पर दिलीप वर्मा के नाम का ईमेल एकाउंट खोला और फिर उसी के मोबाइल पर दिलीप की फेसबुक आईडी बना डाली।
अरविंद ने अपने मोबाइल से पहला मेसेज 20 फरवरी को किया, उस पर लिखा कि दिलीप वर्मा चोर है। दूसरा मेसेज पुलवामा अटैक को लेकर डाला। तीसरा मेसेज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा में धमाका करने का डाला, जिसके बाद पुलिस ने अजयपाल को पकड़ लिया। अरविंद को लगा कि दिलीप के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी तो उसने प्रधानमंत्री को जान से मारने की धमकी देने की पोस्ट डाल दी। पुलिस ने आईपी एड्रेस खंगालते हुए और फेसबुक मुख्यालय कैलिफोर्निया से आई रिपोर्ट के आधार पर शनिवार देर रात अरविंद को गिरफ्तार कर लिया। उससे सख्ती के साथ पूछताछ की गई। उसके बाद अरविंद ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। बाद में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अरविंद को जेल भेज दिया।
अजय पाल को मिली क्लीन चिट
फर्जी ईमेल आईडी और फेसबुक आईडी जेनरेट करने के बारे में अजयपाल को भी नहीं पता था लेकिन उसके मोबाइल पर दोनों अकाउंट खोले गए थे। इससे पुलिस ने दिलीप वर्मा की ओर से अजयपाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। अब पुलिस ने अजयपाल को क्लीन चिट दे दी है।
संभल का व्यक्ति भी हुआ फर्जीवाड़े का शिकार
जिस तरह अजयपाल अरविंद के बनाए जाल में फंस गया, उसी तरह संभल जिले के बहजोई थाना क्षेत्र के ग्राम राजा का मझोला निवासी नाजिम पुत्र शकील भी फंस गया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कई दिन पूछताछ की लेकिन पूरा मामला खुलने के बाद उसे भी दोष मुक्त कर दिया गया है।